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फ्री ज्‍योतिष टूल्‍स

त्‍वरित उत्‍तर

अपनी आंखों को बंद करें और अपने ईष्‍ट देवता का ध्‍यान करें। इसके बाद मन में अपने प्रश्‍न को दोहराएं और फिर जवाब के लिए दिए गए बटन पर क्‍लिक करें।

मंगल दोष

ज्‍योतिषानुसार जन्‍मकुंडली में मंगल दोष को मांगलिक दोष भी कहा जाता है। कुंडली में मंगल की स्थिति के आधार पर मांगलिक दोष निर्भर करता है। कुंडली में...

चंडाल दोष

गुरु ज्ञान एवं बुद्धि प्रदान करता है तो वहीं राहु छाया ग्रह है जो सदा अनिष्‍ट फल देता है। माना जाता है कि बृहस्‍पति देवताओं के गुरु हैं और राहु राक्षसों के गुरु हैं। इन दोनों ग्रहों...

पितृ दोष

कुंडली के नवम् भाव में सूर्य और राहु की युति होने पर पितृ दोष योग बनता है। ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार सूर्य और राहु जिस भी ग्रह में बैठते हैं, उस भाव के सभी फल...

कालसर्प दोष

ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार कुण्डली में राहु और केतु के विशेष स्थिति में होने पर कालसर्प योग बनता है। कालसर्प दोष के बारे में कहा गया है कि यह जातक के पूर्व जन्म...

राशि-लग्‍न

सौरमंडल में परिक्रमा करते हुए चंद्र ग्रह, मनुष्य के जन्म के समय जिस राशि में होता है वही उसकी राशि कहलाती है। उस विशेष राशि और राशि के स्वामी के स्वभाव, गुण और दोष...

गंडमूल नक्षत्र

शास्त्रों में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख किया गया है। इनमें से कुछ नक्षत्र शुभ होते हैं तो वहीं कुछ नक्षत्र अशुभ माने जाते हैं। इन अशुभ नक्षत्रों को ही गंडमूल नक्षत्र कहा...

अंगारक योग

जब कुंडली में राहु अथवा केतु में से किसी एक के साथ अथवा दृष्टि से मंगल ग्रह का संबंध बन जाए तो उस कुंडली में अंगारक योग का निर्माण होता है। कुंडली में अंगारक...

केमद्रुम योग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार केमद्रुम योग, चंद्रमा द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण योग है। चंद्रमा से द्वितीय और द्वादश स्थान में किसी भी ग्रह के न होने पर केमद्रुम योग...

धन योग

कुंडली में धनयोग से बढिया और कोई सुख नहीं है। धन-वैभव की प्राप्ति हेतु कुंडली में धन योग या लक्ष्मी योग काफी महत्वपूर्ण है। कुंडली में बनने वाले कुछ विशेष योग...

प्रेत बाधा

प्रेत बाधा का अ‍र्थ मनुष्‍य के शरीर पर किसी भूत-प्रेत का साया पड़ जाना है। यह योग न केवल जातक को परेशान करता है अपितु उसके पूरे परिवार को भयभीत...

पंच महापुरूष योग

पंच महापुरुष योग एक ऐसा योग है जिसमें जातक को सभी प्रकार के सुख मिलते हैं। यह योग अपनी राशि में पांच ग्रहों के स्थित होने एवं उच्च होकर केन्द्र में स्थित हाने पर...

रत्‍न सलाह

सर्वप्रथम रत्‍नों का उल्‍लेख ऋग्‍वेद में किया गया था। इसके अलावा बादशाह अकबर के शासन काल में भी रत्‍न शब्‍द का प्रयोग किया गया है। बादशाह अकबर अपने खासमखास मंत्रियों...

नाग दोष

ज्‍योतिष शास्‍त्र के अनुसार राहु ग्रह का संबंध नाग से है। राहु के प्रभाव से उत्‍पन्‍न होने वाले दुर्योगों को ही नाग दोष कहा जाता है। जब कुंडली में राहु और केतु पहले घर में, चन्द्रमा...

मोक्ष योग

मोक्ष योग के बनने पर मनुष्‍य जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त होता है। इस योग के प्रभाव में जातक के कर्म शुभ होते हैं और उसके मन में वैराग्य के भाव उत्‍पन्‍न होते रहते...

शनि साढ़े साती

शनि ग्रह के कुंडली में जन्म की राशि एवं नाम की राशि से बारहवें, प्रथम या दूसरे भाव में होने पर शनि की यह गोचर स्थिति शनि की साढ़ेसाती कहलाती है। शनि साढ़े साती...

रुद्राक्ष कैलकुलेटर

रुद्राक्ष को साक्षात् भगवान शिव का स्वरूप कहा गया है। रुद्राक्ष को धारण करने से आपके जीवन के सारे कष्टा और सभी समस्यापएं दूर हो जाती हैं। रुद्राक्ष...