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राहु

राहु के शुभ होने पर व्यक्ति को कीर्ति, सम्मान, राज वैभव व बौद्धिक उपलब्धता प्राप्त होती हैं परन्तु राहु के अशुभ होने पर जो राहु की महादशा, अंर्तदशा, प्रत्यन्तर व द्वादश भावों में राहु की स्थिति के दौरान व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों व कष्टों का सामना भोगना पड़ता हैं। राहु के प्रभाव से जातक आलसी तथा मानसिक रूप से सदैव दुःखी रहता है। इस ग्रह को शांत करने के लिए निम्न उपाय करें -:

वैदिक मंत्र:

ऊँ कयानश्चित्र आभुवदूतीसदा वृध: सखा । कयाशश्चिष्ठया वृता।

गायत्री मंत्र

ॐ नाकाध्वजाय विद्महे पद्माहस्ताय धीमहि तन्नो राहू: प्रचोदयात।

ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्न: राहू: प्रचोदयात्।।

बीज मंत्र

ऊॅं ऐं हृीं राहवे नमः।

तांत्रिक मंत्र

ऊँ ऎं ह्रीं राहवे नम:

ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:

ऊँ ह्रीं ह्रीं राहवे नम:

राहु ग्रह की शांति के उपाय:
  • शनिवार को पूजा करें और इस दिन पूर्णत: शाकाहारी भोजन का सेवन करना चाहिए।
  • अगर आपकी कुंडली में राहु-केतू का दोष है तो भगवान शिव की पूजा करें। प्रतिदिन 21 बार ओउम् नम: शिवाय का जाप करें।
  • राहु शांति पूजा करें। इस पूजा को आप घर पर आयोजित करवाएं, इससे आपके घर में सुख और शांति भी आएगी।
  • श्रीकला हस्ती मंदिर आंध्र प्रदेश में स्थित है। जिन लोगों के जीवन में राहु-केतू दोष है वह इस मंदिर में दर्शन के लिए अवश्य जाएं।
 
राहु के बारह घरों पर प्रभाव
 
रत्‍न

गोमेद को राहू का रत्न माना जाता है। यह एक प्रभावशाली रत्न है जो राहू के दोषों को दूर करने में सक्षम है। इस रत्न‍ के दो उपरत्न हैं जिन्हें गोमेद के स्था‍न पर धारण किया जा सकता है। पहला उपरत्न है तुरसा और दूसरा साफी।

 
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