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सूर्य

सूर्य नौ ग्रहों में राजा है और मनुष्य की आत्मा का कारक है। कहते हैं यदि कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में है, तो जातक के जीवन को भाग्य, लक्ष्मी, आरोग्य, मान सम्मान, यश और कीर्ति से भर देता है, लेकिन कुंडली में यदि सूर्य खराब है तो अपनी अशुभ स्थिति के चलते जातक को न केवल रोगी बना देता है बल्कि मान सम्मान, आत्मनविश्वास में भी कमी देता है। सूर्य ग्रह के मंत्र :

वैदिक मंत्र:

ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च।

हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन।।

गायत्री मंत्र

ऊँ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।

बीज मंत्र

ऊॅं हृीं घृणिः सूर्याय नमः।

तांत्रिक मंत्र

ऊॅं हृॉ हृीं हृौं सः सूर्याय नमः।

सूर्य ग्रह की शांति के उपाय -:
  • रविवार के दिन गुड़, सोना, तांबा और गेहूं का दान करें।
  • सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पुष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए।
  • रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए।
  • ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ में धारण किया जा सकता है।
  • लाल गाय को रविवार के दिन दोपहर के समय दोनों हाथों में गेहूँ भरकर खिलाएं।
  • किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य पर जाते समय घर से मीठी वस्तु खाकर निकलना चाहिए।
  • हाथ में मोली (कलावा) छः बार लपेटकर बाँधने से लाभ होता है।
  • लाल चन्दन को घिसकर जल में डालकर स्नान करें।
 
सूर्य का बारह घरों पर पड़ने वाला प्रभाव
 
रत्‍न

सूर्य के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाने के लिए माणिक्य धारण करना चाहिए। किंतु यदि सूर्य शुभ नही है तो माणिक्य धारण करने से इसका सकारात्मक फल नहीं मिल पाता है। माणिक्य रत्न एक मूल्यवान रत्न है। यदि कोई इसे खरीदने में असक्षम है तो वह इसके स्थान पर स्पाइनेल, गारनेट, जिरकॉन या एजेट धारण कर सकता है।

 
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