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नीलकंठ महादेव मंदिर

समुद्रतल से 5500 फीट की ऊंचाई पर ऋषिकेश की स्‍वर्ग आश्रम की पहाड़ी पर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर अपने अनूठे सौंदर्य और पौराणिक महत्‍व के लिए प्रसिद्ध है। यह तीर्थ विष्णुकूट, ब्रह्माकूट और मणिकूट पहाड़ियों का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय विष का पान किया था जिसके बाद वे इसी स्‍थान पर विश्राम के लिए आए थे। विषपान के बाद विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया जिस कारण ही उन्हें नीलकंठ नाम से जाना जाता है। नीलकंठ महादेव मंदिर में शिव को नीलकंठ के रूप में पूजा जाता है। पहाड़ों और झरनों से घिरे नीलकंठ मंदिर का र्सांदर्य अत्‍यंत मनोरम है।

मुख्‍य आकर्षण

हरिद्वार के मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य में बसा मनोहारी नीलकंठ महादेव मंदिर के शिखर के तल पर अनूठी कला में समुद्र मंथन के दृश्य को चित्रित किया गया है। मंदिर के गर्भ गृह के प्रवेश-द्वार पर चित्रित कला में प्रभु शिव के विषपान का सजीव चित्रण है। यहां श्रावण के महीने और फाल्गुन की शिवरात्रि में भगवान शिव की आराधना बड़ी धूमधाम से की जाती है। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहाँ भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर की दीवारों पर की गई नक़्क़ाशी देखते ही बनती है।

लक्ष्‍मण झूला

यह झूला नगर की विशिष्ट पहचान है। मान्‍यता है कि यह झूला स्‍वयं लक्ष्‍मण जी ने बनाया था। झूले पर खड़े होकर आसपास के खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है।

त्रिवेणी घाट

ऋषिकेश में स्नान करने का यह प्रमुख घाट है। इस स्थान पर हिन्दू धर्म की तीन प्रमुख नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है।

वशिष्‍ठ गुफा

3000 साल पुरानी इस गुफा में भगवान राम और बहुत से राजाओं के पुरोहित वशिष्ठ का निवास स्थल था। कहा जाता है यह स्थान भगवान राम और बहुत से राजाओं के पुरोहित वशिष्ठ का निवास स्थल था।

ऋषिकुंड

ऋषिकुण्ड एक पवित्र तालाब है जो ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के पास स्थित है। पर्यटक तालाब के पानी में भगवान राम और सीता को समर्पित प्राचीन रघुनाथ मन्दिर का प्रतिबिम्ब देख सकते हैं।

अन्‍य पर्यटन स्‍थल

नीलकंठ मंदिर आए दर्शनार्थी कई पर्यटक व धार्मिक स्‍थल का भ्रमण कर सकते हैं जैसे स्‍वर्ग आश्रम, भरत मंदिर, राम झूला, कैलाश निकेतन मंदिर, गीता भवन, हनुमान मंदिर, भद्रकाली मंदिर, समाधि मंदिर, ओंकारनंद कामाक्षी देवी मंदिर, वीरभद्र मंदिर, स्‍वर्ग निवास मंदिर, श्री त्रयंबकेश्‍वर मंदिर के साथ ही ऋषिकेश में ट्रैकिंग और रिवर राफ्टिंग का भी लुत्‍फ उठा सकते हैं।

कैसे पहुंचे

वायुमार्ग द्वारा ऋषिकेश से 18 किमी. की दूरी पर देहरादून के निकट जौली ग्रान्ट एयरपोर्ट नजदीकी एयरपोर्ट है। ऋषिकेश का नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जो शहर से 5 किमी. दूर है। यहां से आपको बस-टैक्‍सी की सुविधा हर समय उपलब्‍ध हो जाएगी।

अन्‍य मंदिर

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