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गंगोत्री

समुद्र तल से 3140 मीटर की ऊंचाई पर गंगा का उद्गम स्‍थल उत्‍तराखंड में स्थित गंगोत्री में है। प्राचीन मान्यता अनुसार भगवान राम के वंशज राजा भागीरथ ने अपने पूवर्जों के उद्धार हेतु इसी पावन स्‍थल पर एक पवित्र शिलाखंड पर बैठकर धरती पर मां गंगा के अवतरण हेतु कठोर तपस्‍या की थी। ऐसी मान्‍यता है कि "यहीं आकाश से गिरती हई गंगा को महादेव जी ने अपने मस्तक पर धारण किया और उन्हें मनुष्य लोक में छोड़ दिया।" गंगोत्री ग्‍लेशियर चारों तरफ से गंगोत्री समूह जैसे - शिवलिंग, थलय सागर, मेरू और भागीरथी तृतीय की बर्फीली चोटियां गंगोत्री के मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाता है। इस ग्‍लेशियर से निकलने वाली तीन सहायक नदियां भी हैं जिनका नाम है - रक्‍तवर्ण, चतुरंगी और कीर्ति।

मुख्‍य आकर्षण

खूबसूरत परिवेश और ऊंची पहाडियों के बीच भागीरथी नदी के तट पर स्थित गंगोत्री मंदिर इस स्‍थान का मुख्‍य आकर्षण है। सफेद पत्‍थरों से निर्मित इस मंदिर में राजस्‍थानी शैली की झलक देखने का मिलती है। यहां का परिवेश अत्‍यंत सुंदर और मनोहारी है। लगभग 700 वर्ष पुराना यह मंदिर हिदूओं के लिए आध्‍यात्मिक प्रेरणा स्रोत है। गंगोत्री के जल को पवित्र माना जाता है तथा शुभ कार्यों में इसका प्रयोग किया जाता है। गंगोत्री से लिया गया गंगा जल केदारनाथ और रामेश्‍वरम के मंदिरों में भी अर्पित होता है। मंदिर के समीप 'भागीरथ शिला' है जिस पर बैठकर भागीरथ ने गंगा को पृथ्‍वी पर लाने के लिए कठोर तपस्‍या की थी।

स्‍थापना काल

प्राचीन काल में इस स्थान में कोई मंदिर नहीं था। केवल भागीरथ शिला के पास चौतरा था जिसमें देवीमूर्ति को यात्राकाल के 3-4 मास दर्शनार्थ रखा जाता था। गंगोत्री में मंदिर का निर्माण गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा 18 वीं शताब्दी के शुरूआत में किया गया था। वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था।

जाने का समय

प्रत्येक वर्ष मई से अक्टूबर के महीनों के बीच गंगा मैंया के दर्शन करने के लिए लाखो श्रद्धालु तीर्थयात्री यहां आते है। मंदिर के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खुलते हैं और दीपावली के दिन मंदिर बंद होते हैं।

अन्‍य दार्शनिक स्‍थल

गंगोत्री पहुंचे यात्री तपोवन, भैरो घाटी, गौमुख, पांडव गुफा, गौरी और सूर्य कुंड, जलमग्‍न शिवलिंग, विश्‍वनाथ घाटी जैसे कई दर्शनीय स्‍थल देख सकते हैं।

कैसे पहुंचे

मां गंगा के इस पावन स्‍थल के दर्शन करने के लिए देहरादून स्थित जौली ग्रांट एयरपोर्ट निकटतम हवाई अड्डा है। गंगोत्री के लिए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पास है। यहां से बस-टैक्‍सी सुविधा आसानी से उपलब्‍ध हो जाती है। 

अन्‍य मंदिर

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