ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली का नवां भाव (भाग्य भाव) अशुभ या क्रूर ग्रहों से प्रभावित हो, तो यह पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं, असंतोष या उनसे जुड़े कर्म-दोष को दर्शाता है। इसी स्थिति को पितृ दोष कहा जाता है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली का नवां भाव (भाग्य भाव) अशुभ या क्रूर ग्रहों से प्रभावित हो, तो यह पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं, असंतोष या उनसे जुड़े कर्म-दोष को दर्शाता है। इसी स्थिति को पितृ दोष कहा जाता है।
यदि किसी जन्म या पूर्व जन्म में:
किसी सत्पुरुष, ब्राह्मण या कुलगुरु का अनादर किया गया हो
पितरों को श्राद्ध, तर्पण या जल अर्पण न किया गया हो
गोहत्या या पितृ दोष से जुड़े गंभीर कर्म किए गए हों
तो ऐसे कर्मों का फल व्यक्ति के जीवन में पितृ दोष के रूप में प्रकट होता है।
पितृ दोष से प्रभावित व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार की व्यक्तिगत, पारिवारिक और आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे:
परिवार में आपसी विवाद, कलह और मानसिक अशांति
बड़े-बुजुर्गों के प्रति अनादर या संबंधों में कटुता
धन की कमी और मेहनत के बावजूद पैसों में बरकत न होना
विवाह में अत्यधिक देरी या बार-बार रिश्ता टूटना
संतान प्राप्ति में बाधा या संतानों से जुड़े कष्ट
करियर, व्यवसाय या नौकरी में लगातार रुकावटें
पितृ दोष शांति पूजा पूर्वजों के असंतोष को शांत करने तथा उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए की जाने वाली एक महत्वपूर्ण वैदिक पूजा है। इस पूजा में पितृ दोष से संबंधित ग्रहों को विशेष वैदिक मंत्रों के माध्यम से शांत किया जाता है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि जब पितृ प्रसन्न होते हैं, तो जीवन में भाग्य, सुख-समृद्धि और स्थिरता का स्वतः संचार होता है।
पितृ दोष निवारण पूजा कराने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
जीवन में रुके हुए एवं अटके कार्यों में गति आती है
मानसिक तनाव, भय और अनिश्चितता से राहत मिलती है
करियर, नौकरी और व्यवसाय में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं
पारिवारिक शांति और आपसी संबंधों में सुधार होता है
संतान एवं विवाह संबंधी समस्याओं में सकारात्मक बदलाव
पूर्वजों का आशीर्वाद और आध्यात्मिक उन्नति
पितृ दोष निवारण पूजा अनुभवी विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन और तर्पण विधि से संपन्न कराई जाती है। यह पूजा अमावस्या, पितृ पक्ष, महालय, या ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ मुहूर्त में कराई जाती है।
पूजन का समय पूर्ण रूप से शुभ मुहूर्त देखकर सुनिश्चित किया जाता है।
धूप, फूल, पान के पत्ते, सुपारी
हवन सामग्री, देशी घी
आम की लकड़ी, आम के पत्ते
गंगाजल, अक्षत, रोली, जनेऊ
कपूर, शहद, चीनी, हल्दी, मिष्ठान
कलावा एवं अन्य पूजन सामग्री
पूजा संपन्न कराने हेतु यजमान से निम्न जानकारी आवश्यक होती है:
नाम एवं गोत्र
पिता का नाम
जन्म तिथि
जन्म स्थान
पूजा के पश्चात यंत्र एवं सूखा प्रसाद प्रदान किया जाता है।
आप AstroVidhi के माध्यम से अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए पितृ दोष निवारण पूजा बुक कर सकते हैं।
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पूजा बुक करते समय संबंधित व्यक्ति का नाम, जन्म स्थान, गोत्र और पिता का नाम अवश्य उपलब्ध कराएं।
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