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सुनेहला रत्न

सुनेहला रत्न

सुनेहला (सिट्रीन)रत्न पीले रंग का नरम तथा पूर्ण पारदर्शक रत्न होता है। यह पुखराज का उपरत्‍न है और पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है इसलिए इसे पहनने से गुरू से संबंधित सभी लाभ मिलते हैं, मान-सम्‍मान की प्राप्‍ति होती है, निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है और सामाजि‍क कार्यों में रूचि बढ़ती है।

 
डिलीवरी: 3-4 दिनों में डिलीवरी
मुफ़्त शिपिंग: पूरे भारत में
फ़ोन पर ख़रीदें: +91 777 5038 777
अभिमंत्रित: फ्री अभिमन्त्रण पंडित सूरज शास्त्री जी द्वारा

विवरण

रत्न:सुनेहला (सिट्रीन)
भार रत्ती में:4.5- 7 रत्ती
मूल:ब्राज़ील
अभिमंत्रित:पंडित सूरज शास्त्री

सुनेहला (सिट्रीन)रत्न पीले रंग का नरम तथा पूर्ण पारदर्शक रत्न होता है। यह पुखराज का उपरत्‍न है और पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है इसलिए इसे पहनने से गुरू से संबंधित सभी लाभ मिलते हैं, मान-सम्‍मान की प्राप्‍ति होती है, निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है और सामाजि‍क कार्यों में रूचि बढ़ती है।

किसे धारण करना चाहिए

वैदिक ज्‍योतिष के अनुसार सुनेहला (सिट्रीन)रत्न गुरू से संबंधित है और यह धनु और मीन पर अधिकार रखता है इसलिए मीन राशि के जातकों के लिए यह रत्न लाभकारी होता है। पश्चिमी ज्‍योतिष के अनुसार यह धनु राशि वालों का बर्थ स्‍टोन है।

सुनेहला (सिट्रीन)रत्न के लाभ

  •  सुनेहला (सिट्रीन)रत्न के प्रभाव से आर्थिक तंगी दूर होती है तथा रुपए-पैसे से संबंधित सभी प्रकार की दिक्कते अपने आप समाप्त होने लगती है।
  •  मानसिक तनाव से छुटकारा पाने के लिए यह रत्न सबसे उत्तम माना गया है।
  •  पढाई में एकाग्रता लाने के लिए और उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए यह रत्न बहुत ही सहायक होता है।
  •  इस रत्न को धारण करने के बाद शिक्षा, न्‍याय और पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र में जातक बेहतर प्रदर्शन करता है।
  •  जो व्यक्ति लम्बे समय से लिवर तथा मधुमेह से सम्बंधित बीमारी से ग्रस्त है, इलाज के बाद भी आराम नहीं मिल रहा हो उस व्यक्ति को यह रत्न अवश्य धारण करना चाहिए, लाभ अवश्य होगा। 
  •  इस रत्न को पहनने से गुस्सा भी शांत होता है और ये हार्मोन्स को कंट्रोल कर आपके दिमाग को शांत करता है।

कब और कैसे धारण करे:-

सुनेहला (सिट्रीन)रत्न बृहस्पति के दिन या गुरु की होरा में पहनना चाहिए ताकि पहनने वाले को इसका लाभ मिल सके लेकिन इससे पहले इस रत्न से जडित अंगूठी, ब्रेसलेट या लॉकेट को कच्चे दूध व गंगाजल के मिश्रण में डुबोए रखें ताकि वह शुद्ध हो जाए। इसके बाद पूजा-अर्चना करने पर ही यह रत्न धारण करना चाहिए। इस रत्न को आप चांदी या पंच धातु में बनवाकर धारण कर सकते हैं। याद रखे कि अंगूठी, ब्रेसलेट या लॉकेट मे सुनेहला (सिट्रीन)कम से कम सवा पांच रत्ती का अवश्य होना चाहिये।

हमसे क्‍यों लें 

इस रत्न को हमारे अनुभवी ज्योतिषी पंडित सूरज शास्त्री जी द्वारा अभिमंत्रित किया गया है जिससे यह आपको जल्‍द ही शुभ फल दे। इस रत्न के साथ सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा जो इस रत्‍न के ओरिजनल होने का प्रमाण है।

 

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