प्रेममिलन
प्रेममिलन मानव जीवन के क्रम को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक है। किन्तु वर्तमान में इसे इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि इसको देखने और समझने का तरीका ही अलग हो गया है।
शास्त्रों में इसके बारे में लिखा है
प्राचीन काल में प्रेम मिलन को इतना महत्व दिया जाता था कि ऋषि-मुनि शास्त्रों में इसके बारे में लिखा करते थे और लोगों का मार्गदर्शन किया करते थे कि किस समय और कैसे प्रेम-मिलन के परिणाम स्वरूप अच्छी संतान प्राप्त होती है।
आनंद प्राप्त करने का माध्यम
भले ही आज के दौर में प्रेम-मिलन को आनंद प्राप्त करने का माध्यम बनाया जा चुका हो किन्तु संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए आज भी प्रेमालाप होना ही एकमात्र तरीका है।
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अच्छी संतान की नींव
इससे अच्छा क्या हो सकता है कि वैदिक नियमों के अनुसार अपने साथी के साथ प्रेम करने का समय तय कर आप अच्छी संतान की नींव रख सकते हैं।
तो संतान होगी गुणवान
शास्त्रों में कहा गया है कि वैदिक नियमों के अनुसार यदि प्रेमालाप जोड़ों का संगम को तो उसके फलस्वरूप उत्पन्न संतान गुणवान, धार्मिक, बड़ों का आदर करने वाली और हर प्रकार से संपन्न होती है।
मिलेंगे देवताओ वाले गुण
वैसे शास्त्रों में प्रेम-मिलन का सही समय रात्रि का प्रथम पहर माना गया है। ऐसा कहते हैं कि इस समय देवता पृथ्वी लोक पर विचरण करते हैं इसलिए इस समय पर रतिक्रिया के उपरांत जो संतान उत्पन्न होती है उसमें देवताओं वाले गुण होते हैं।
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होगी दानवों के गुण वाली संतान
ऐसे ही यदि मध्यरात्रि को अगर प्रेम-मिलन किया जाए तो उत्पन्न होने वाली संतान में दानवों के गुण होते हैं क्योंकि उस दौरान पृथ्वीलोक में राक्षसें का विचरण होता है।
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