ज्योतिष में सूर्य के गोचर को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। सूर्य के राशि परिवर्तन को आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना गया है। मकर संक्रांति भी सूर्य के राशि परिवर्तन का ही पर्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव 6 माह दक्षिणायन में रहने के बाद राशि परिवर्तन कर उत्तरायन होते हैं। हर साल की 14 या 15 जनवरी को सूर्य धनु राशि का भ्रमण पूर्ण कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यह इकलौता ऐसा त्योहार है जो हर साल एक ही तारीख पर आता है। मंकर संक्रांति के समय को पुण्य काल माना गया है। सबसे पहले जानते हैं संक्रांति के अर्थ के बारे में -:
संक्रांति का अर्थ होता है संक्रमण काल या बदलाव का समय। संक्रांति उस काल या तिथि को कहते हैं जिस दिन सूर्य एक राशि में भ्रमण पूरा कर दूसरी राशि में प्रवेश करता है।
मकर संक्रांति इतनी ज्यादा पवित्र है कि महाभारत काल के महान नायक भीष्म पितामह ने शरीर के तीरों से घायल होने के बावजूद मृत्युशैया पर लेटकर प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायन में प्रवेश का इंतजार किया था। मान्यता है कि जो व्यक्ति सूर्य के मकर में गोचर करने के दौरान अपना शरीर त्याग यानि मृत्यु को प्राप्त होता है उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में मकर संक्रांति को पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। कई जगह मकर संक्रांति के दिन लोग पतंग उड़ाते हैं तो कुछ तिल-गुड़ की मिठाईयां बनाते हैं। मकर संक्रांति का त्योहार सेहत के लिए भी कई तरीके से फायदेमंद है. सुबह-सुबह पतंग उड़ाने के बहाने जो धूप शरीर को लगती है, उससे भरपूर विटामिन डी मिलता है. इसे त्वचा के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है और सर्द हवाओं से होने वाली कई समस्याओं को दूर करने में भी यह मददगार होती है. देश के कई हिस्सों में मकर संक्रांति के साथ तीर्थ की शुरुआत भी होती है. उत्तर प्रदेश में इसी के साथ कुंभ मेला शुरू होता है तो केरल में शबरीमाल. इस दिन लोग पवित्र नदियों में डुबकी भी लगाते हैं. वैज्ञानिक तरीके से देखें तो यह सर्दी के मौसम के बीतने का सूचक है और मकर संक्रांति पर दिन व रात बराबर अवधि के माने जाते हैं. इसके बाद से दिन लंबे और मौसम में गर्माहट होने लगती है. इसके बाद कटाई या बसंत के मौसम का आगमन मान लिया जाता है.
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मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए ‘ॐ घृणाय सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का मकर संक्रांति के दिन जाप करने से हर तरह के कार्य सिद्ध होते हैं। विशेषकर संतान प्राप्ति और रोजगार के लिए इस मंत्र का विशेष महत्व है।
इसके अलावा मैं आपको राशि अनुसार मकर संक्रांति के दिन कुछ उपाय बताती हूं जिनसे निश्चित ही आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी होंगीं।
मेष राशि का स्वामी मंगल है तो आप मकर संक्रांति के दिन मच्छरदानी एवं तिल का दान करें। वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है इसलिए इस राशि के लोगों को मकर संक्रांति के दिन ऊनी वस्त्र एवं तिल का दान करना चाहिए। तीसरी राशि मिथुन का स्वामी बुध है तो आप लोग तिल एवं मच्छरदानी का दान करें। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है इसलिए आप इस दिन तिल, साबूदाना एवं ऊन का दान करें। सिंह राशि का स्वामी सूर्य है तो आप तिल, कंबल व मच्छरदानी अपनी क्षमतानुसार दान करें। कन्या राशि का स्वामी बुध है तो आप मकर संक्रांति के दिन तिल, कंबल, तेल, उड़द दाल का दान करें। तुला का स्वामी शुक्र है इसलिए तुला राशि के लोग तेल, रुई, वस्त्र, राई, मच्छरदानी दान करें। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। इस राशि के लोग गरीबों को चावल और दाल की कच्ची खिचड़ी साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार कंबल भी दान करें। धनु का स्वामी गुरु है तो आप मकर संक्रांति के दिन तिल व चने की दाल का दान करें। मकर राशि का स्वामी शनि है तो आप तेल, तिल, कंबल और पुस्तक का दान करें। वहीं कुंभ राशि का स्वामी भी शनि है। कुंभ राशि के लोग तिल, साबुन, वस्त्र, कंघी व अन्न का दान करें। आखिरी राशि मीन का स्वामी गुरु है तो इस राशि के लोग तिल, चना, साबूदाना, कंबल व मच्छरदानी दान करें।
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