मूंगा को अंग्रेजी भाषा में कोरल कहते है, इसका सम्बन्ध मंगल ग्रह से होता है। प्राचीन काल से ही ज्योतिषियों का यह मानना है कि मूंगा रत्न धारण करने से मंगल ग्रह की पीड़ा शांत होती है।
मूंगा को अंग्रेजी भाषा में कोरल कहते है, इसका सम्बन्ध मंगल ग्रह से होता है। प्राचीन काल से ही ज्योतिषियों का यह मानना है कि मूंगा रत्न धारण करने से मंगल ग्रह की पीड़ा शांत होती है।
इस रत्न को पोला, मिरजान, लता मणि, कोरल, भौम, प्रवाल आदि नामों से लोग जानते है। वैसे तो ज्यादातर मूंगा लाल रंग का होता है, परन्तु यह गहरे लाल, सिंदूरी लाल, नारंगी आदि रंग में भी पाए जाते है। बेहतरीन मूंगा जापान और इटली के समुन्द्रों में पाया जाता है।
मूंगा रत्न के तथ्य-
प्राचीन समय से ही यह माना जाता है कि मूंगा एक वनस्पति है, जिसका एक पेड़ है लेकिन यह रत्न समुद्र में पाया जाता है, यह एक समुद्री वनस्पति है।
मूंगा जितना समुद्र कि गहराई में होता है, उसका रंग उतना ही हल्का हो जाता है।
मूंगा के लाभ-
मूंगा धारण करने से पराक्रम में वृद्धि होती है तथा आलस्य में कमी आती है।
कुंडली में स्थित मांगलिक योग कि अशुभता को मूंगा रत्न कम कर देता है, मांगलिक दोष से होनेवाली खामियों में कमी आती है।
स्रियों में रक्त की कमी और मासिक धर्म और रक्तचाप जैसी परेशानियों को नियंत्रित करने के लिए मूंगा रत्न से जडित अंगूठी अवश्य धारण करनी चाहिए।
जो जातक शत्रुओं का सामना नहीं कर पा रहे, आत्मविश्वास और साहस की कमी है, तो मूंगा रत्न अवश्य धारण करे आपके पराक्रम में वृद्धि होगी।
जिन बच्चों में दब्बूपन होता है, उनको यह रत्न अवश्य पहनना चाहिए इसके प्रभाव से बच्चों के अंदर साहस और हिम्मत बढ़ती है।
पुलिस, आर्मी, रेस्तरां व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों को मूंगा रत्न अवश्य पहनना चाहिए, इस रत्न के प्रभाव से उनको कामकाज में सफलता अर्जित होती है।
मूंगा रत्न के प्रभाव से आकर्षण शक्ति बढ़ती है, लोगों को देखने का नजरिया बदलता है।
मूंगा रत्न कौन धारण कर सकता है तथा किस रत्न के साथ पहने मूंगा
मेष या वृश्चिक राशि के जातक इस मूंगा रत्न की अंगूठी को धारण कर सकते है, इसके अलावा सिंह, धनु, मीन राशि के लोग भी मूंगा धारण कर सकते है।
मंगल का मित्र सूर्य ग्रह है, अतः माणिक के साथ भी मूंगा धारण किया जा सकता है।
मूंगा पुखराज तथा मोती के साथ भी पहना जा सकता है।
धारण विधि
मूंगा मंगलवार के दिन दायें हाथ की अनामिका अंगूली में मंगल देवता को याद करते हुए पूर्ण विधि-विधान से धारण करना चाहिए।
हमसे क्यों ले
इस अंगूठी को हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्य द्वारा अभिमंत्रित करने के बाद आपके पास भेजा जाएगा, ऐसा करने से आपको इस रत्न के शीघ्र ही शुभ फल मिल सके, इसके अलावा इस रत्न के साथ सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा जो इस रत्न के ओरिजनल होने का प्रमाण है।