
चंद्र ग्रहण वह खगोलीय स्थिति है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिसके कारण चंद्रमा का पूर्ण या आंशिक भाग ढक जाता है। इस स्थिति को ही चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
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चंद्र ग्रहण वह खगोलीय स्थिति है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिसके कारण चंद्रमा का पूर्ण या आंशिक भाग ढक जाता है। इस स्थिति को ही चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
हिंदू धर्म और ज्योतिष में चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक दृष्टि से इसे सामान्यतः अशुभ प्रभाव देने वाली अवस्था माना जाता है। ग्रहण काल के दौरान ईश्वर आराधना, मंत्र जाप और ध्यान को विशेष फलदायी बताया गया है। वहीं गर्भवती महिलाओं को इस समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली में चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक ग्रह माना जाता है। यदि कुंडली में:
चंद्रमा पर राहु या केतु की दृष्टि हो
चंद्रमा राहु या केतु के साथ युति में हो
चंद्रमा नीच राशि में स्थित हो
चंद्रमा अशुभ या पापी ग्रहों से घिरा हो
तो इस स्थिति को चंद्र ग्रहण दोष कहा जाता है। यह दोष व्यक्ति के मानसिक, पारिवारिक और वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस दोष के शमन हेतु चंद्र ग्रहण दोष शांति पूजा अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
चंद्र ग्रहण दोष शांति पूजा कराने से जीवन में निम्नलिखित सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं:
जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की वृद्धि
चंद्रमा मन का कारक ग्रह होने के कारण मानसिक तनाव, भय और अस्थिरता से मुक्ति
पति-पत्नी के बीच मतभेद, तनाव या अलगाव की स्थिति में कमी
पारिवारिक संबंधों में प्रेम और आपसी समझ बढ़ना
कार्य-व्यवसाय में धन लाभ, प्रतिष्ठा और स्थिरता
वाहन, मकान और भौतिक सुखों की प्राप्ति
परिवार में धन-धान्य और आर्थिक बरकत
हिंदू मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय कुछ विशेष सावधानियां अपनानी चाहिए:
ग्रहण काल में भोजन या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि राहु-केतु के प्रभाव से गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक असर पड़ सकता है
घर में रखे अनाज या भोजन में दूर्वा घास या तुलसी के पत्ते डालने चाहिए
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें
स्नान के पश्चात ब्राह्मण को अन्न या धन का दान करें
चंद्र ग्रहण दोष शांति हेतु निम्न मंत्रों का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
मंत्र 1:
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः
मंत्र 2:
ॐ सों सोमाय नमः
यह मंत्र जितनी श्रद्धा, शुद्ध भावनाओं और विश्वास के साथ जपा जाएगा, उतना ही अधिक शुभ फल प्रदान करेगा।
इस पूजा में चंद्र देव और भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। अनुभवी वैदिक पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण, हवन और संकल्प के साथ यह पूजन संपन्न कराया जाता है। पूजा का समय जातक की कुंडली देखकर शुभ मुहूर्त अनुसार निर्धारित किया जाता है।
धूप, फूल, पान के पत्ते, सुपारी
हवन सामग्री और देसी घी
मिष्ठान, गंगाजल, कलावा
आम की लकड़ी और आम के पत्ते
अक्षत, रोली, जनेऊ
कपूर, शहद, चीनी, हल्दी
गुलाबी कपड़ा
इस पूजा के प्रभाव से:
अटके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं
मानसिक और शारीरिक चिंताएं कम होती हैं
कुंडली में मौजूद चंद्र ग्रहण दोष के अशुभ प्रभाव कमजोर पड़ते हैं
जीवन में स्थिरता, सकारात्मकता और संतुलन आता है
पूजा संपन्न कराने के लिए निम्न जानकारी आवश्यक होती है:
नाम एवं गोत्र
पिता का नाम
जन्म तिथि
जन्म स्थान
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पूजा बुक करते समय संबंधित व्यक्ति का नाम, जन्म स्थान, गोत्र और पिता का नाम अवश्य उपलब्ध रखें।
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