बहुत भाग्‍यशाली लोगों की कुंडली में आता है सूर्य योग, जानिए क्‍या आपकी कुंडली में है

ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार सूर्य सफलता का कारक है और जिस व्‍यक्‍ति पर सूर्य की कृपा हो जाए उसे जीवन में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। कुंडली में सूर्य योग भी कुछ ऐसा ही है।

सूर्य ग्रह कुंडली में अशुभ हो जाए तो जातक को अत्‍यंत प्रयास करने के बाद भी अपने कार्यों में सफलता हासिल नहीं हो पाती है। नौकरी और करियर या बिजनेस में तरक्‍की पाने के लिए तो सूर्य का शुभ होना अत्‍यंत जरूरी है। इसके बिना किसी भी व्‍यक्‍ति को सफलता मिल ही नहीं पाती है।

सूर्य को अनुकूल

कुंडली में तृतीय भाव में सूर्य की उपस्थिति जातक की आय में वृद्धि करता है। वहीं अगर कोई व्‍यक्‍ति अन्‍याय सहता है या अन्‍याय देखकर मूक बना रहता है तो उसका सूर्य कमज़ोर बनता है। घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद पाकर और तीर्थयात्रा के ज़रिए कुंडली में सूर्य को अनुकूल बनाया जा सकता है।

कुंडली में सूर्य का प्रभाव

यदि कुंडली में सूर्य शुभ प्रभाव दे रहा है तो व्‍यक्‍ति आत्‍मविश्‍वासी बनता है और समाज को एक नई दिशा देता है। वहीं अगर सूर्य अशुभ स्‍थान में बैठा हो जो जातक निराशा की ओर चलने लगता है और उसे हड्डी से संबंधित रोग से ग्रस्‍त होकर ही अपना पूरा जीवन व्‍यतीत करना पड़ता है।

अगर किसी व्‍यक्‍ति की जन्‍मकुंडली में सूर्य अशुभ फल दे रहा है तो वह इन ज्‍योतिषीय उपायों से उसके दुष्‍प्रभाव को कम कर सूर्य देव को प्रसन्‍न कर उनकी कृपा दृष्टि पा सकता है।

सूर्य योग के उपाय

पहले भाव में बैठकर सूर्य अशुभ फल दे रहा है तो उस व्‍यक्‍ति को अपने जीवन में सत्‍य का साथ देना चाहिए। सूर्य योग के लिए अपनी आय का एक हिस्‍सा जरूरतमंदों की सहायता में खर्च करें। इससे आपके जीवन के कष्‍ट कम हो पाएंगें।

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दूसरे भाव में सूर्य का निदान

जन्‍मकुंडली के दूसरे भाव में सूर्य अशुभ प्रभाव दे तो जातक झगड़ालू बनता है और अपनी तीखी बातों से अपना पतन कर लेता है। आपको अपनी वाणी पर नियं‍त्रण रखना चाहिए। धार्मिक स्‍थलों पर दान और सदाचार का पालन करें।

तृतीय भाव

तृतीय भाव में सूर्य की उपस्थिति जातक की आय में वृद्धि करता है। वहीं अगर कोई व्‍यक्‍ति अन्‍याय सहता है या अन्‍याय देखकर मूक बना रहता है तो उसका सूर्य कमज़ोर बनता है। घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद पाकर और तीर्थयात्रा के ज़रिए कुंडली में सूर्य को अनुकूल बनाया जा सकता है।

चतुर्थ भाव में सूर्य योग

इस भाव में सूर्य व्‍यक्‍ति को अपने जन्‍मस्‍थान से दूर ले जाता है। इस भाव में बैठे सूर्य को अनुकूल करने के लिए किसी नेत्रहीन व्‍यक्‍ति को 43 दिन तक भोज करवाएं और तांबे का सिक्‍का गले में धारण करवाएं।

पंचम भाव

जन्‍मकुंडली के इस घर में सूर्य का अशुभ प्रभाव जातक की संतान के लिए होता है। इन्‍हें पेट से संबंधित परेशानी रहती है। आपको लाल मुंह वाले बंदरों को गुड़-चना खिलाना चाहिए। रोज़ सूर्य देव को अर्घ्‍य दें।

छठे भाव में सूर्य योग

इस भाव में सूर्य व्‍यक्‍ति को अजातशत्रु बनाता है। रात को सिरहाने पानी रखकर सोएं। पिता के साथ मधुर संबंध बनेंगगें और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। चांदी की वस्‍तु अपने पास रखें।

सप्‍तम भाव में सूर्य

इस भाव में बैठे सूर्य का शुभ प्रभाव पाने के लिए खाने में नमक का प्रयोग कम करें। काली या बिना सींग वाली गाय की सेवा करें और भोजन करने से पूर्व रोटी का एक टुकड़ा रसोई की आग में डालें।

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अष्‍टम में सूर्य योग

आपको अपने घर में सफेद रंग का कपड़ा ना रखें। किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले मीठा खाकर पानी पीएं। बहती नदी में गुड प्रवाहित करें।

नवम भाव का उपाय

उपहार या दान में कभी भी चांदी की वस्‍तु ना लें। चांदी की वस्‍तुएं दान करें। क्रोध से बचें और वाणी में मधुरता लाएं।

दशम भाव  

इस भाव में सूर्य का शुभ प्रभाव पाने के लिए काले और नीले रंग के कपड़े ना पहनें। किसी बहती नदी में 43 दिन तक तांबे का सिक्‍का प्रवाहित करें। मांस-मदिरा के सेवन से बचें।

ग्‍यारहवे भाव में सूर्य

आपको मांस और मदिरा के सेवन से बचना चाहिए। रात को सोते समय अपने सिरहाने बादाम या मूली रखकर सोएं। दूसरे दिन इन चीज़ों को मंदिर में दान कर दें।

बारहवे भाव में सूर्य योग

अपने घर में एक आंगन जरूर बनाएं। धर्म का पालन करें। दूसरों की गलतियों के क्षमा कर दें। सूर्य की शांति के लिए सूर्य यंत्र की स्‍थापना अपने घर या ऑफिस में करें। अभिमंत्रित सूर्य यंत्र प्राप्‍त करने के लिए यहां क्‍लिक करें

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