कुंडली में बृहस्पति और राहु का किसी भी तरह संबंध होने से गुरु चाण्डाल दोष का निर्माण होता है। गुरु ज्ञान के दाता हैं तो राहु छाया ग्रह है जो सदा अशुभ फल देता है। कुंडली में गुरु और राहु की युति होने पर यह योग बनता है। छाया ग्रह राहु के प्रभाव में आने से गुरु भी अशुभ फल देने लगता है। चाण्डाल दोष को साढ़ेसाती, कालसर्प दोष और मंगल दोष से भी भयंकर माना गया है।
कुंडली के हर ग्रह दोष को शांत करने की शक्…
कुंडली में चाण्डाल योग बनने पर जातक षड्यंत्र रचता है, अनैतिक व्यवहार अपनाता है, उसका पराई स्त्रियों में मन लगता है एवं उसका चारित्रिक पतन होता है। इसके अलावा राहु – चोरी, जुआ, सट्टा, अनैतिक तरीके से धन अर्जन की प्रवृत्ति, मद्यपान सहित हिंसक व्यवहार आदि प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है। ज्योतिष शास्त्र में चाण्डाल दोष को शांत करने के विभिन्न उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आप इस दोष के बुरे प्रभावों से बच सकते हैं।
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उपाय -:
– कुंडली में चाण्डाल दोष बन रहा है तो राहु ग्रह का जप-दान करने से लाभ होगा।
– चाण्डाल दोष को शांत करने के लिए गाय को भोजन कराएं एवं नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करें।
– कुंडली में चाण्डाल दोष के कारण आपको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय बड़ों की राय अवश्य लें।
– चाण्डाल दोष से पीडित जातक अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें एवं प्रसन्न रहें।
– बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें और अपने माता-पिता का आदर करें।
– अपने गुरु की निस्वार्थ भाव से सेवा करें।
– कुंडली में चाण्डाल दोष है तो आप नियमित रूप से स्वयं हल्दी और केसर का टीका लगाएं।
– चाण्डाल दोष से त्रस्त लोग गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करें।
– भगवान गणेश और देवी सरस्वती की आराधना करें और मंत्र का जाप करें।
– चाण्डाल दोष के निवारण हेतु बरगद के वृक्ष में कच्चा दूध डालें और केले के वृक्ष का भी पूजन करें।
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