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गोवर्धन पूजा (अन्न कूट) 2020, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और तिथि

गोवर्धन पूजा या अन्न कूट का त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानि ये पूजा दीपावली के अगले दिन होती है। हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। वर्ष 2020 में गोवर्धन पूजा 15 नवंबरके दिन की जाएगी। उत्तर भारत के कई हिस्‍सों जैसे मथुरा और वृंदावन, बरसाना, नंदगाव, गोकुल आदि में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्‍व है और इन स्‍थानों पर गोवर्धन पूजा बड़ी धूमधाम और उल्‍लास के साथ मनाई जाती है।

गोवर्धन पूजा पर्व तिथि – रविवार,15 नवंबर 2020

गोवर्धन पूजा सांयकाल मुहूर्त : 15.18:37 से 17.27:15 तक

प्रतिपदा तिथि आरंभ : 15 नवंबर को 10.36 से

प्रतिपदा तिथि का समापन : 16 नवंबर को 07:05 तक

गोवर्धन पूजन की विधि

गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। यह त्यौहार इस धरती पर रहने वाले मानव जाति को इस बात का संदेश देता है कि हमारा जीवन प्रकृति द्वारा प्रदान संसाधनों पर निर्भर है और इसके लिए हमें उनका सम्मान और धन्यवाद करना चाहिए। गोवर्धन पूजा के जरिए हम समस्त प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं।

  • गोवर्धन पूजा सुबह या शाम के समय की जाती है। गोवर्धन पूजा के दिन प्रात:काल जल्‍दी उठकर शरीर पर सुगंधित तेल और उबटन लगाने के बाद स्‍नान करें और उसके बाद घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं।

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  • गोवर्धन बनाने के बाद उसे फूलों से सजाया जाता है। पूजन के दौरान गोवर्धन पर धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल आदि चढ़ाये जाने चाहिए। इसी दिन गाय-बैल और कृषि काम में आने वाले पशुओं की पूजा की जाती है।
  • गोवर्धन पूजा के दिन आपको इसी की पूजा करनी है और अन्‍न्‍कूट का भोग लगाना है।
  • पूजा के बाद गोवर्धन जी की सात परिक्रमाएं लगाते हुए उनकी जय बोली जाती है। परिक्रमा के वक्त हाथ में लोटे से जल गिराते हुए और जौ बोते हुए परिक्रमा पूरी की जाती है।
  • द्वापर युग से ही यह परंपरा चली आ रही है। इस पर्वत के पास ही भगवान कृष्‍ण की प्रतिमा स्‍थापित करें और 56 भोग लगाएं। पूजन कर कथा करें और वहां उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद बांट दें।

गोवर्धन पूजा से होती हैं पुण्‍य की प्राप्‍ति

गोवर्धन पूजा का दिन प्रकृति को उसकी कृपा के लिए धन्‍यवाद करने का दिन है। भगवान कृष्‍ण ने गोवर्धन पर्वत के द्वारा लोगों को प्रकृति का महत्‍व समझाया था। गोवर्धन पूजा के मौके पर लाखों लोग मथुरा में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते आते हैं और इनमें विदेशी सैलानी और भक्‍त भी शामिल होते हैं। मान्‍यता है कि गोवर्धन पूजा करने से धन और धान्‍य की प्राप्‍ति होती है और संतान एवं गोरस मिलता है। इस दिन गोवर्धन देव से प्रार्थना की जाती है कि वो पृथ्‍वी को धारण करने वाले भगवान आप हमारे रक्षक हैं और हमें भी अपनी धन-संपदा प्रदान करें। इस दिन को गौ दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन गौ सेवा करने से पुण्‍य की प्राप्‍ति होती है।

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इस दिन होती है श्रीकृष्‍ण की पूजा

इस शुभ दिन पर भगवान विष्‍णु के अवतार श्रीकृष्‍ण की पूजा होती है। यह पर्व अनेक मान्‍यताओं और लोक कथाओं से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर श्रीकृष्‍ण की उपासना करने से भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

गोवर्धन पूजा की कथा

गोवर्धन पूजन के बारे में कई लोक कथाएं प्रचलित हैं जिनमें से एक कथा ये भी है कि ब्रज में रहने वाले लोग देवों के राजा इंद्र की पूजा किया करते थे। इसके पीछे कारण था कि देवराज इंद्र प्रसन्‍न होकर वर्षा करते जिससे अन्‍न पैदा होता लेकिन भगवान कृष्‍ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि इंद्र देव की पूजा करने से अच्‍छा है कि आप हमारे पर्वत की पूजा करें जो गायों को भोजन देते हैं।

तब ब्रज वासियों ने श्रीकृष्‍ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करना शुरु कर दिया। इस बात से रुष्‍ट होकर इंद्र देव ने बादलों को गोकुल में भीषण वर्षा करने का आदेश दिया। आदेशानुसार बादलों ने ब्रज की भूमि पर मूसलाधार बारिश शुरु कर दी।

साथ ही तेज तूफान भी आया है और पूरी गोकुल नगरी तहस-नहस हो गई। तब अपने नगरवासियों के प्राणों की रक्षा के लिए श्रीकृष्‍ण ने सभी को गोवर्धन पर्वत की शरण में चलने के लिए कहा।

जब सभी गोवर्धन पर्वत के निकट पहुंचे तो श्रीकृष्‍ण ने पर्वत को अपनी कनिष्‍ठिका अंगुली पर उठा लिया और सभी ब्रजवासी भागकर गोवर्धन पर्वत के नीचे आ गए। ब्रजवासियों पर एक बूंद बारिश भी नहीं गिरी।

भगवान की लीला को जानकर इंद्र देव ने क्षमा मांगी और सात दिन बाद श्रीकृष्‍ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और इस तरह ब्रजवासियों के प्राणों की रक्षा की। बस तभी से हर साल गोवर्धन पूजा और अन्‍नकूट पर्व मनाया जाता है।

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