विदेश यात्रा
ज्यादातर लोग विदेश में बसने या पढ़ाई करने का सपना देखते हैं। लेकिन ये सपना हर किसी का पूरा नहीं हो पाता। दरअसल, कोई व्यक्ति विदेश यात्रा पर जा पाएगा या नहीं, ये कुंडली के ग्रहों की स्थिति से पता लगाया जा सकता है। आइए जानते हैं कुंडली में विदेश यात्रा बताने वाले खास योग के बारे में -:
लग्न भाव में सूर्य
– यदि कुंडली के लग्न भाव में सूर्य हो तो उस जातक के विदेश जाने के योग बनते हैं। इसके अलावा बुध आठवें भाव में विराजमान हो तो भी जातक को विदेश जाने का मौका मिलता है।
लग्न भाव का स्वामी
– कुंडली में शनि के बारहवें भाव में होने पर या लग्न भाव का स्वामी बारहवें भाव में हो तो विदेश यात्रा की रहती है।
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सप्तम भाव में चर राशि
– लग्न भाव का स्वामी सप्तम भाव में चर राशि में हो तो विदेश यात्रा के योग बनते हैं। दशम भाव का स्वामी नवम भाव में चर राशि में स्थित हो तो विदेश यात्रा पर जाना पड़ता है।
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सप्तम भाव का स्वामी
– अगर कुंडली के सप्तम भाव का स्वामी नवम भाव में हो तो व्यक्ति विदेश जा सकता है। इसके अलावा यदि कुंडली में गुरु चौथे, षष्ठम, अष्टम या ग्यारहवें भाव में हो तो विदेश यात्रा के योग बनते हैं।
द्वादश भाव का स्वामी
– द्वादश भाव का स्वामी और नवम भाव का स्वामी राशि परिवर्तन कर रहें हो या चंद्रमा ग्यारहवें या बारहवें भाव में बैठा हो तो विदेश यात्रा के योग बनते हैं।
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