तलाक की वजह
वैवाहिक जीवन में मनमुटाव या तालमेल न बनने पर अलगाव की स्थिति उत्पन्न होती है। पति-पत्नी के बीच बहुत ज्यादा अनबन हो तो ये उन दोनों को अलग कर देती है। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली (Kundali) में सूर्य, शनि, राहु और बारहवें स्थान का स्वामी वैवाहिक जीवन में अलगाव की स्थिति उत्पन्न करता है। कुंडली (Kundali) का सप्तम स्थान, सप्तमेश तथा सप्तम स्थान का कारक ग्रह वैवाहिक सुख का संकेत देता है।
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सप्तम भाव में सूर्य
जन्मकुंडली (Kundali) के सप्तम भाव पर सूर्य के विराजमान होने पर जीवनसाथी के बढ़ते अहंकार और अपनी बात आगे रखने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। इस कारण यह स्थिति अलगाव का रूप ले लेती है।
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शनि का सप्तम भाव में होना
कुंडली (Kundali) के सप्तम भाव में शनि की उपस्थिति के कारण वैवाहिक जीवन में अलगाव के कई कारण जन्म लेते हैं। इसके कारण जीवनसाथी की वाणी में कठोरता और अपने कर्त्तव्यों का निर्वाहन न करने की स्थिति उत्पन्न होती है।
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सप्तम भाव में राहु
कुंडली (Kundali) के इस भाव में राहु हो तो ऐसी स्थिति में जीवनसाथी रहस्यमयी बनता है। ये अपने पार्टनर से बहुत कुछ छिपाकर रखते हैं। कुंडली में राहु का सप्तम भाव जीवनसाथी के झूठ बोलने की प्रवृत्ति को भी दर्शाता है।
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व्ययेश का सप्तम भाव में होना
कुंडली (Kundali) में व्ययेश का सप्तम में प्रभाव होने से अलगाव के छोटे-छोटे कारण सामने आते हैं। शारीरिक संबंधों को लेकर समस्या आती है। कुंडली (Kundali) के सप्तम स्थान पर जितना अधिक पाप ग्रहों का वर्चस्व होगा उतनी ही ज्यादा वैवाहिक जीवन में समस्या आएगी।
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