हम सभी जानते है कि पितृ पक्ष बहुत ही जल्दी आरम्भ होने वाला है और हम यह भी जानते है की पित्तरो का हमारे जीवन पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है, भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक की अवधि को ही पितृपक्ष कहते है।

पितृ दोष निवारण पूजा
पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करते है, तर्पण का अर्थ होता है की हम अपने पितरों को भूले नहीं है और वे हमारे लिए सदैव पूजनीय है, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे पितृ दोष है तो ऐसे व्यक्ति को हर क्षेत्र में असफलता ही मिलती है।
उसको जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट भोगने पड़ते है, ख़ास कर संतान से सम्बंधित दिक्कते और धन से सम्बंधित दिक्कते बनी रहती है। ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है इससे मुक्ति पाने का सबसे आसान उपाय पितरों का श्राद्ध कराना है और इसी के साथ अगर आप अपने घर में पितृ दोष निवारण पूजा कराते है तो पितृ दोष से श्रापित जीवन से जल्दी ही मुक्ति मिलती है। यह पूजा महीने में आनेवाली प्रत्येक अमावस्या को करने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
पितृ दोष निवारण पूजा का प्रभाव
- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उसे पितृ दोष निवारण पूजा करने से अवश्य ही लाभ होगा। पितृ दोष के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए ही यह पूजा की जाती है।
- यह पूजा करने से जातक के मन में अध्यात्म के प्रति रूचि बढ़ती है और उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
- इस पितृ दोष निवारण पूजा के प्रभाव से जीवन की सारी बाधाएं और मुश्किलें दूर होती हैं।
- संतानहीन जातकों को पितृ दोष निवारण पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है।
- गृहस्थ जीवन और कामकाज में आ रही सभी समस्याओ से निजात मिलती है और घर में धन-धान्य और सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पितृ दोष की शांति के लिए अपने पितरों को याद करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
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पूजन सामग्री
धूप, फूल पान के पत्ते, सुपारी, हवन सामग्री, देसी घी, मिष्ठान, गंगाजल, कलावा, हवन के लिए लकड़ी (आम की लकड़ी), आम के पत्ते, अक्षत, रोली, जनेऊ, कपूर, शहद, चीनी, हल्दी और गुलाबी कपड़ा|
पूजन का समय
आप यह पूजा महीने में आनेवाली अमावस्या को भी करवा सकते है इसके अलावा पितृ पक्ष के दौरान यह पूजा करना सबसे उत्तम माना गया है|
पितृ दोष निवारण पूजन का महत्व
यह पूजा कराने से आपके महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होते हैं। संतान की प्राप्ति होती है तथा इस पूजा के प्रभाव से आपके जितने भी रुके हुए काम हैं वो पूरे हो जाते हैं। शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं। पितृ दोष से मुक्ति मिलती है तथा आत्मविश्वास बढ़ जाता है।
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यजमान द्वारा वांछित जानकारी
नाम एवं गोत्र, पिता का नाम, जन्म तारीख, स्थान ||
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