सभी ग्रहों के गुरु हैं बृहस्पति देव। बृहस्पति देव मनुष्य के विवाह से संबंधित पहलुओं पर अपना प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा उनके पूजन से सुख और समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। अगर किसी की कुंडली में विवाह से संबंधित कोई दोष है या आपके विवाह में देरी या कोई बाधा आ रही है तो आपको बृहस्पति देव को प्रसन्न करने में लग जाना चाहिए।
अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह अशुभ स्थान में बैठा है तो आपको इससे संबंधित क्षेत्रों में असफलता मिलती है।
गुरुवार का दिन बृहस्पतिदेव को समर्पित है। मान्यता है कि गुरुवार के दिन कुछ उपाय करने से जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। गुरुवार के दिन बृहस्पतिदेव की आराधना करने से धन, संपदा, सुख-शांति तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। गुरु ग्रह की शांति के लिए भी गुरुवार के दिन कुछ उपाय करने से विशेष लाभ मिलता है।
गुरुवार के चमत्कारिक उपाय
– गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है। अगर आपकी कुंडली में गुरु पाप ग्रह के साथ बैठकर अशुभ फल दे रहा है तो आप गुरुवार के दिन ब्राह्मणों की सेवा करें और उनसे आशीर्वाद लें।
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गुरुवार को इन चीज़ों का करें दान
– गुरुवार के दिन मंदिर में चने की दाल का दान करें और केसर का तिलक लगाएं। जरूरतमंद लोगों को पुस्तकों का दान करें। ऐसा करने से आपको पुण्य की प्राप्ति होगी और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगीं।
सफलता का उपाय
– अगर आपको अपने कार्यों में सफलता नहीं मिल पा रही है या आप प्रयास करके थक चुके हैं तो आपको ब्रह्मा जी का केले से पूजन करना विशेष लाभ दे सकता है। बृहस्पति देव की पूजा से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और कार्यों में सफलता भी मिलती है।
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विवाह का उपाय
– जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही हो उन्हें भी गुरु की पूजा अवश्य करनी चाहिए। गुरु विवाह और भाग्य का कारक ग्रह है इसलिए गुरुवार का व्रत रखने से विवाह में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
गुरुवार को ना करें ये काम
– बृहस्पतिवार के दिन बाल धोना, नाखून काटना, शरीर पर साबुन लगाना शुभ नहीं माना जाता। अगर आपकी कुंडली में गुरु दोष है तो आपको विशेष तौर पर इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
पुखराज करें धारण
– कुंडली में गुरु शुभ स्थान में नहीं बैठा है या आपका वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं चल रहा है तो आपको गुरु का चमत्कारिक रत्न पुखराज धारण करना चाहिए।
कोई भी रत्न तब तक फायदा नहीं पुहंचाता जब तक कि उसे उसके अधिष्ठाता ग्रह के मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित ना किया जाए। इसलिए अभिमंत्रित पुखराज रत्न ही धारण करें। आप चाहें तो AstroVidhi से भी अभिमंत्रित पुखराज रत्न खरीद सकते हैं।
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