आज के समय में लव मैरिज का चलन कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। हर कोई चाहता है कि वो अपनी पसंद से अपने लिए जीवनसाथी चुने।
शादी से पहले उसके साथ कुछ समय बिताए और आपसी तालमेल होने के बाद ही शादी तक बात पहुंचे लेकिन हर किसी का ये सपना पूरा नहीं हो सकता है।
अगर आप भी लव मैरिज करने के सपने देखते हैं तो आपको बता दूं कि राशिचक्र की 12 राशियों में से 3 ऐसी राशियां हैं जिनकी लव मैरिज की संभावना सबसे ज्यादा रहती है।
मेष राशि

राशिचक्र की सबसे पहले राशि मेष का नाम इस सूची में सबसे पहले आता है। मेष राशि के लोगों का स्वभाव थोड़ा चंचल होता है। इसी वजह से दूसरों के बीच अपनी जगह बनाने में सफल हो पाते हैं।
मेष राशि के लोगों की लव मैरिज की संभावना ज्यादा रहती है। विवाह के शुरुआती समय में इनके जीवन में थोड़ी-बहुत परेशानियां आती हैं लेकिन ये अपने स्वभाव से हर मुश्किल को संभाल लेते हैं।
कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों का स्वभाव थोड़ा गंभीर माना जाता है। ये हर काम को सोच समझकर करते हैं। ये जातक बहुत रोमांटिक भी होते हैं और यही वजह है कि ये अपने प्यार को शादी तक पहुंचाकर ही दम लेते हैं। कुंभ राशि के लोग अपने वैवाहिक जीवन में आने वाली मुश्किलों को अपनी सूझबूझ से हल कर लेते हैं।
मकर राशि

लव मैरिज के मामले में मकर राशि के लोग सबसे ज्यादा भाग्यशाली होते हैं। इन्हें अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। इनके आसपास हमेशा प्यार का माहौल रहता है।
इन्हें बड़ी आसानी से अपना प्यार मिल जाता है। ये अपने पार्टनर का बहुत ख्याल रखते हैं और इसी वजह से इनका पार्टनर इनसे शादी करने के लिए इनकार नहीं कर पाता है।
कुंडली में प्रेम विवाह के योग

- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का सप्तम भाव विवाह का भाव होता है। यदि सप्तम भाव का संबंध कुंडली के तीसरे, पांचवे, नौंवे या बारहवें भाव से हो तो उस जातक का प्रेम विवाह होता है।
- लग्न स्थान के स्वामी और सप्तम भाव के स्वामी के बीच युति हो तो ऐसी स्थिति में जातक के प्रेम विवाह के योग बनते हैं।
- सौरमंडल के ग्रह गुरु और शुक्र विवाह के कारक ग्रह माने जाते हैं। लड़कियों की कुंडली में गुरु का पाप प्रभाव में होना और लड़के की कुंडली में शुक्र का पाप प्रभाव में होना प्रेम विवाह के योग का निर्माण करता है।
- इसके अलावा यदि लग्न भाव का स्वामी, पंचमेश के साथ युति कर रहा हो या दोनों का आपस में दृष्ट संबंध हो या राशि परिवर्तन हो तो उस जातक के प्रेम विवाह की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
- सप्तम या पंचम भाव या इन भावों के स्वामी पर राहु का प्रभाव हो या इन भावों का स्वामी तीसरे, पांचवें, सातवें, ग्यारहवें या बारहवें भाव में बैठा हो तो उस व्यक्ति का निश्चित ही प्रेम विवाह होता है।
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