संकटमोचन हनुमान जी के चमत्कारों से सभी वाकिफ हैं। हम सभी जानते हैं कि कलिुयग में एकमात्र हनुमान जी ही ऐसे देवता है जो अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। अगर आप हनुमान जी की पूजा करते हैं या उनसे किसी मनोकामना की पूर्ति हेतु प्रार्थना करते हैं तो आपके सारे कष्ट पल में दूर हो जाते हैं।
संकटमोचन हनुमान जी की 10 रहस्यमयी बातें
भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी को महाबलशाली माना गया है। चे अजर-अमर हैं। अंजनि पुत्र हनुमान जी के जीवन से संबंधित कुछ ऐसे रहस्य हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
जी हां, आज हम आपको हनुमान जी के जीवन से जुड़ी ऐसी ही रहस्यमयी बातों बारें में बताने जा रहे हैं।
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- बहुत कम लोग जानते हैं कि हनुमान जी भगवान शिव का अवतार हैं और उनका जन्म अपनी माता के श्राप को हरने के लिए हुआ था।
- जब हनुमान जी ने सुना कि सीता माता अपने पति भगवान राम की लंबी आयु और सकुशलता के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं तो उन्होंने भी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था। तभी से बजरंग बली को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा शुरु चली आ रही है।
- हनुमान की की ठोड़ी के आकार के कारण ही उनका यह नाम पड़ा है। दरअसल, संस्कृति में हनुमान जी का मतलब बिगड़ी हुई ठोड़ी होता है और अपनी ठोड़ी की वजह से ही उन्हें ये नाम मिला।
- वैसे तो दुनियाभर में हनुमान जी को ब्रह्मचारी के रूप में जाना जाता है लेकिन उनका एक पुत्र भी है। हनुमान जी के पुत्र का नाम मकरध्वज है जोकि उनकी ही तरह महाशक्तिशाली था।
- किवंदती है कि एक बार भगवान राम के गुरु विश्वामित्र जी हनुमान जी से नाराज़ हो गए थे और उन्होंने क्रोध में आकर भगवान राम से हनुमान जी को मौत की सज़ा देने के लिए कह दिया था। गुरु के आदेश का पालन करना प्रभु राम के लिए अनिवार्य था इसलिए उन्होंने हनुामन जी को सज़ा दी लेकिन इस दौरान हनुमान जी राम नाम जपते रहे और उनके ऊपर प्रहार किए सारे शस्त्र विफल हो गए।
- लंका पर विजय पाने और श्री राम के राजा बनने के बाद ही हनुमान जी ने हिमालय के पहाड़ों पर जाकर अपने नाखूनों से रामायण ग्रंथ लिखना शुरु कर दिया था। इस बात का पता चलने पर वाल्मीकि जी ने हिमालय जाकर उस रामायण का पढ़ा था लेकिन बाद में उसे हनुमान जी ने समुद्र में फेंक दिया।
- पांडव पुत्र भीम महाबलशाली था और वह हनुमान जी का भक्त भी था। पवन देव के पुत्र होने के कारण भीम हनुमान जी के भाई भी थे। भीम की माता कुंती ने पवन देव से ही भीम को पाया था।
- भगवान राम ने जब जल समाधि का निर्णय लिया तब वो जानते थे कि हनुमान जी को ये स्वीकार्य नहीं होगा और इस वजह से वो धरती पर उथल-पुथल मचा देंगें। इससे बचने के लिए श्रीराम ने ब्रह्मा जी का सहारा लिया और हनुमान जी को शांत रखने के लिए उन्हें पाताल लोक भेज दिया।
- हनुमान जी को माता सीता ने कीमती सोने का हार भेंट किया किंतु हनुमान जी ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया। इस बात से माता सीता गुस्सा हो गईं। उस समय हनुमान जी ने अपनी छाती को चीरकर दिखाया कि प्रभु राम की छवि तो उनके दिल में बसती है। इससे ज्यादा उन्हें और कुछ नहीं चाहिए।
- जीवन का सार हनुमान जी के संस्कृत में 108 नाम हैं और उनके हर नाम का मतलब उनके जीवन के अध्यायों का सार बताता है।
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