ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब कभी भी कोई ग्रह अशुभ प्रभाव देता है तो उससे संबंधित काम बिगड़ने लगते हैं। किसी तरह के रोग, आर्थिक तंगी या असफलता का कारण भी ग्रहों को ही माना गया है। आज हम सूर्य के अशुभ प्रभाव के बारे में पढ़ेंगें।
ज्योतिष की मानें तो जीवन की सभी घटनाएं चाहें वो अच्छी हों या बुरी, उनका संबंध ग्रहों से होता है। जब कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उससे संबंधित कार्यों में सफलता मिलती है लेकिन जब कोई ग्रह अशुभ फल दे तो उससे संबंधित सभी क्षेत्रों में काम बिगड़ते हैं और असफलता मिलती है।
बीमारी देने वाला ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में अलग-अलग ग्रहों को बीमारियों का कारक माना गया है। आज हम आपको बताएंगें कि कौन-सा ग्रह क्या अशुभ फल देता है और इनसे किस तरह की बीमारियां होती हैं।
सूर्य देता है ये रोग
यदि कुंडली में सूर्य अशुभ फल दे रहा है तो जातक को नेत्र संबंधी कोई परेशानी हो सकती है। आंखों से जुड़ी बीमारी या सिर में दर्द सूर्य के अशुभ प्रभाव की वजह से होता है। अगर आपको इनमें से कोई परेशानी हो रही है तो आपको सूर्य कमज़ोर हो सकता है।
चंद्रमा और मंगल का रोग
चंद्रमा कफ और पेट से संबंधित रोग देता है जबकि मंगल के अशुभ प्रभाव देने पर रक्त से संबंधित रोग उत्पन्न होते हैं। मंगल का संबंध रक्त से होता है इसलिए वो रक्त से संबंधित रोग देता है।
बुध के रोग
जब किसी की कुंडली में बुध कमज़ोर होता है तो उसे नसों और दांतों से सबंधित समस्या होने लगती है। इसलिए ऐसी स्थिति में आपको बुध को प्रसन्न करने के उपाय करने चाहिए।
गुरु और शुक्र का रोग
गुरु के अशुभ प्रभाव के कारण सांसों से संबंधित रोग होते हैं। जैसे कि कुंडली में गुरु के कमज़ोर होने पर दमा, सायनस आदि जैसे रोग होने की संभावना रहती है। कमज़ोर शुक्र वीर्य से संबंधित रोग देता है।
शनि का प्रभाव
नौ ग्रहों में सबसे ज्यादा क्रूर शनि को माना जाता है। अगर शनि देव किसी पर कूपित हो जाएं तो उस व्यक्ति को पेट से संबंधित रोग जैसे – अपच, गैस आदि की परेशानी होने लगती है। रोगों के अलावा शिन का अशुभ प्रभाव और भी कई तरह से नुकसान पहुंचाता है।
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राहु-केतु का असर
अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो इसका कारण राहु का अशुभ प्रभाव हो सकता है। इसके अलावा ज्योतिष में मूत्र संबंधित रोगों का कारण केतु को माना गया है।
ग्रहों के उपाय
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हाथ में घोड़े की नाल का छल्ला धारण करें।
गुरु की कृपा पाने के लिए गुरु यंत्र और शुक्र के लिए शुक्र यंत्र की स्थापना अपने घर में करें।
सूर्य से संबंधित शुभ फल पाने के लिए माणिक्य रत्न धारण कर सकते हैं।
चंद्रमा को शांत करने के लिए मोती और मंगल के लिए मूंगा रत्न धारण करें।
बुध ग्रह की शांति के लिए ग्रीन एवेंच्यूरिन माला का प्रयोग करें।
राहू के लिए राहु शांति ताबीज़ धारण करें और केतु को प्रसन्न करने के लिए लहसुनिया पहनें।
अगर आप इन सभी नौ ग्रहों की कृपा पाना चाहतें हैं और इन सभी को एकसाथ प्रसन्न करना चाहते हैं तो आप नवग्रह शांति कवच भी धारण कर सकते हैं।
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