admin

छठ पूजा 2019 मे कब है? जानिये तिथि व शुभ मुहूर्त

छठ पूजा उत्तर भारत के राज्यों का महापर्व क्यों है, जाने ख़ास बातें

छठ  पूजा मुहूर्त

2 नवंबर 2019- शनिवार के दिन छठ पूजा का पर्व मनाया जाएगा

2 नवंबर 2019 (संध्या अर्ध्य) सूर्यास्त का समय- 05 बजकर 36 मिनिट

3 नवंबर 2019 (उषा अर्ध्य) सूर्योदय का समय- प्रात: 6 बजकर 34 मिनिट

कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाये जाने वाले पर्व को उत्तर भारत में छठ पर्व के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। कई क्षेत्रों में इसे सूर्य षष्ठी के नाम से भी लोग जानते है। यह पर्व दिवाली के 6 दिन के बाद मनाया जाता है। इस पर्व की रौनक बिहार-झारखंड के अलावा देश के कई हिस्सों में भी देखने को मिलती है।

Chhath Puja 2019

छठ पूजा उत्तर भारत के राज्यों का महापर्व क्यों है, जाने ख़ास बातें

छठ पूजा का पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्य बिहार, झारखण्ड के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पीछे क्या है ख़ास बाते आइए जानते है।

  • 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक चलेगा छठ पर्व, 2 नवंबरकी शाम आस्था और भक्ति के साथ होगी सूर्य की पूजा-अर्चना।
  • 36 घंटे लगातार होता है यह व्रत और खरना के अगले दिन सूर्य की पूजा के बाद ही व्रत को खोला जाता है।
  • छठ पूजा में सूर्य देव की आराधना तथा पूजा-अर्चना करने का विधान है।
  • संतान की रक्षा हेतु ही इस पर्व को मनाने की परम्परा है, पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी मैया या षष्ठी माता संतान सुख प्रदान करती है तथा संतान की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं।
  • जो लोग संतान सुख से वंचित है, वे अगर इस व्रत को करते है तो उन्हें जल्दी ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • घर में सुख-समृद्धि तथा पारिवारिक सुख बरक़रार रहे, इसीलिए भी छठ पूजा का महत्व है।
  • सूर्य की तरह ही जीवन में प्रकाश बना रहे तथा जीवन में आनेवाला अन्धकार दूर करने के लिए इस पूजा को किया जाता है क्योंकि सूर्य प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देने वाले देवता है, जो पृथ्वी पर सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं।

छठ पूजा चार दिनों तक मनाया जाने वाला त्यौहार है, जिसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को इस पर्व का समापन किया जाता है।

अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें

पहला दिन- नहाय खाय (31 अक्टूबर)

छठ पूजाका पहला दिन नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घर की साफ-सफाई की जाती है तथा मन और आत्मा को शुद्ध रखते हुए तामसिक भोजन का त्याग किया जाता है और सात्विक एवं शाकाहारी भोजन ग्रहण किया जाता है।

दूसरा दिन- खरना- (1 नवंबर)

छठ पूजा का दूसरा दिन खरना के नाम से जाना जाता है। खरना का मतलब पुरे दिन के उपवास से है, इस दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति पानी की एक बूँद तक ग्रहण नहीं करता और निर्जल व्रत करता है। शाम को गुड की खीर, घी लगी हुई रोटी और फल ग्रहण किये जाते है साथ ही घर के बाकी सदस्यों को इसे प्रसाद के तौर पर परोसा जाता है।

तीसरा दिन- संध्या अर्ध्य (2 नवंबर)

कार्तिक शुक्ल षष्ठी को संध्या के समय सूर्य देव को अर्ध्य दिया जाता है यह छठ पूजा का तीसरा दिन होता है। संध्या के समय बांस की टोकरी में फलों, ठेकुवा, चावल के लड्डू आदि से अर्ध्य का सूप सजाया जाता जाता है और प्रसाद भरे सूप से छठी मैया की पूजा की जाती है। सूर्य देव की पूजा कर रात्रि में छठी माता के गीत गाए जाते है और व्रत कथा सुनी जाती है।  

चौथा दिन- उषा अर्ध्य (3 नवंबर)

इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। छठ पर्व के अंतिम दिन सुबह के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। संतान की रक्षा और स्वस्थ्य और लम्बी आयु की कामना करते हुए परिवार की सुख-शनि का वर माता छठी से माँगा जाता है। पूजा के बाद व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोडा प्रसाद खाकर व्रत पूरा करती है, जिसे पारण या परना कहा जाता है। 

अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें

 अर्ध्य देने की विधि

बांस से बनी टोकरी में गन्ना, फल, ठेकुवा, चावल के लड्डू रखें उसके बाद सूप में ही दीपक जलाएं और नदी में उतरकर सूर्य को अर्ध्य दें।  

संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here