मां दुर्गा की आराधना के सबसे पवित्र दिनों में शारदीय नवरात्रि का नाम भी आता है। इस बार नवरात्रि 1 अक्टूाबर से शुरु होकर 10 अक्टूबर को खत्म हो रहें हैं. आपको बता दें कि इस बार नवरात्रि नौ दिन की जगह दस दिन तक मनाये जाएंगें। एक दिन बढ़ने से भक्तों को मां की आराधना के लिए एक दिन ज्यादा मिलेगा। ज्योतिष की दृष्टि से यह संयोग शुभ रहने वाला है।
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इस बार नवरात्र की तृतीया तिथि दो दिन से 3 और 4 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नवरात्रे के ग्यारहवें दिन को दशहरे का त्योहार मनाया जाएगा। इससे पहले 427 साल पहले नवरात्र की तिथियों में बढ़ोत्तरी हुई थी. उस समय नौ में से सात ग्रहों की जो स्थिति थी इस बार नवरात्र में भी ठीक वैसी ही स्थिति है। सूर्य और गुरु कन्या राशि में और शुक्र तुला राशि में मंगल धनु राशि में, केतु कुंभ राशि में और बुध सिंह राशि में विराजमान हैं।
शनि यंत्र ताबीज़ पहनने से शनि देव होंगें प्रसन्न
- पूजा के कमरे को साफ-सुथरा रखें।
- पंडित जी की सहायता से कलश की स्थापना करें।
- माता को दूध और जल से स्नान कराएं।
- माता को वस्त्र पहनाएं, उनका श्रृंगार करें।
- माता के बाईं ओर दीपक जलाएं।
- लाल फूल, रोली, चंदन, फल दूर्वा, तुलसी का पत्ता और प्रसाद अवश्य रखें।
- यंत्र या सिद्धि करने वाली सामग्री स्थापित करें।
- कलश के ठीक सामने मिट्टी और रेत मिलाकर ज्वार बोएं।
- दुर्गा सप्तशती नामक किताब में दिए मंत्र से माता का आवाह्न करें।
- दुर्गा सप्तशती किताब से कवच, अर्गला, कीलक आदि का पाठ करें।
- जप अवश्य करें। जप के समय मुंह पूर्व दिशा में हो।
- पूजा के उपरांत क्षमा प्रार्थना करके ही उठें।
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