भारतीय संस्कृति में हर शुभ कार्य की शुरूआत तिलक से होती है। घर में किसी नए सदस्य का आगमन हो या फिर किसी शुभ कार्य के लिए आप बाहर जा रहे हों, माथे पर तिलक लगाकर जाना शुभ माना जाता है। भगवान की पूजा-अर्चना और हवन आदि में भी तिलक लगाने का प्रचलन काफी पुराना है। मान्यतानुसार सूने मस्तक को अशुभ और असुरक्षित माना जाता है। माथे पर तिलक लगाने के आध्यात्मिक महत्व भी हैं।
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मनुष्य के शरीर में अपार शक्ति के भंडार 7 सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। माथे पर तिलक के स्थान पर आज्ञाचक्र होता है जो हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है क्योंकि यहां शरीर की प्रमुख तीन नाडियां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती है। इस स्थान को त्रिवेणी और संगम भी कहा जाता है। इसी को मन का घर भी कहा जाता है और यही कारण है कि यह स्थान शरीर में सबसे ज्यादा पूजनीय है।
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पुराणों में कहा गया है कि संगम तट पर गंगा स्नान के बाद तिलक लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि स्नान करने के बाद पंडों द्वारा विशेष तिलक अपने भक्तों को लगाया जाता है। माथे पर तिलक लगाने से स्वभाव में सकारात्मकता आती है, साथ ही देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता है। मनोवैज्ञानिक प्रभाव की बात करें तो तिलक लगाने से आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है। नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तिषक को ठंडक मिलती है और मन को शांति एवं सुकुन का अहसास होता है। सिरदर्द में आराम के साथ-साथ मानसिक बीमारियों से भी रक्षा मिलती है।

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