कुंडली में इस योग के बनने पर परेशान करता है पितृ दोष

यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली  में पितृदोष हो तो व्यक्ति अत्यधिक परेशानी से घिरा हुआ रहता है। व्यक्ति को प्रत्येक क्षेत्र में समस्या आती है। शिक्षा, विवाह, नौकरी, व्यापार, धन, और स्वास्थ्य इनमे से कुछ न कुछ समस्या लगातार बनी रहती हैं।

व्यक्ति के प्रयास सफल नही हो पाते। सन्तान व घर दोनो के द्वारा दुख उत्पन्न होता है।यह सब पितृ दोष की निशानी है।  पितृ दोष के कारण आने वाली मुख्य समस्या इस तरह है-

लग्न स्थान में प्रभाव

यदि पितृदोष का प्रभाव लग्न स्थान में बन रहा हो तो जातक के जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बाधाये आती हैं। व्यक्ति के जीवन में संघर्ष किसी साथी की तरह बना रहता हैं।

 

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चौथे व ग्यारहवें स्थान में पितृ दोष 

पितृ दोष यदि दूसरे चौथे व ग्यारहवें स्थान में बन रहा हो तो जातक पैतृक सम्पति से हीन, धन का दुरुपयोग करने वाला होता है। धन की अस्थिरता रहती हैं। ऐसे इन्सान के पास चाहे कितना भी धन हो नष्ट हो जाता हैं। घर के सुखों से वंचित होता है।

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इन भावों में पितृ दोष

कुंडली के तीन, छ:, आठ, व बारहवें स्थान में पितृ दोष के बनने के कारण व्यक्ति के निर्णय गलत होते हैं। व्यक्ति कई बार अपने ही पांव में कुल्हाडी मारता हैं। जल्दबाजी,क्रोधी, अस्वस्थ शरीर या अन्य प्रकार की समस्या बनी रहती हैं। ऐसा इंसान घर से दूर अकेला भटकता रहता हैं। कानूनी मुकदमा भी ऐसे लोगों के ऊपर बनता हैं।

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पंचम भाव पर पितृ दोष

पंचम स्थान पर बने पितृदोष की वजह से जातक को संतान सुख से वंचित करती हैं या संतान को लेकर कुछ न कुछ समस्या बनी रहती हैं। ऐसे इंसान को शिक्षा से सम्बंधित दिकक्त आती हैं। कार्य क्षेत्र में भी मान सम्मान नही मिल पाता।

नवम या दशम स्थान

पितृ दोष यदि नवम या दशम स्थान पर बन रहा हो तो जातक को पिता का सुख कम मिलता हैं, ऐसे इंसान को कमर के निचले हिस्सों में दिक्क्त होती हैं। व्यापार या नौकरी में अनेक समस्या आती हैं।

 

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सप्तम स्थान पर पितृ दोष

सप्तम स्थान पर पितृ दोष की स्थिति जातक को वैवाहिक सुखों से हीन करती हैं। दूसरे नम्बर की संतान को कष्ट होता है। व्यक्ति को कई प्रकार के गुप्त रोग होते हैं।

पितृदोष का विशेष प्रभाव व्यक्ति को पिता के सुख से दूर करता हैं। संतान व पिता में वैर रहता हैं।

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1 COMMENT

  1. My birthday is on 15-06-1974
    Please tell me does I have pitrudosh in my kundli. In which position rahu i have in my kundli.

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