केपी पद्धति के अनुसार कब होगा विवाह ?

मेरे एक मित्र ने एक जातक की जानकारी दी और पूछा कि इस जातक के 10-10-2016 को विवाह संपन्‍न होने के पीछे क्‍या कारण था? यह सच में काफी रोचक कुंडली है। मैंनें इस जातक की कुंडली का आंकलन करने के लिए केपी पद्धति का प्रयोग किया। जानकारी के अनुसार कुंडली इस प्रकार है -:

रूल :

सातवें घर के उपस्‍वामी का संबंध 2-7-11 भावों से है।

एप्‍लिकेशन :

यहां पर उपस्‍वामी राहु है जोकि दूसरे और सातवें भाव के स्‍वामी मंगल के साथ सातवें घर में बैठा है। ग्‍यारहवें भाव के नक्षत्र में राहु और उप नक्षत्र में सूर्य बैठा है। अत: इनका विवाह होना तो निश्चित है।

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राहु के नक्षत्र में कोई नहीं है। लेकिन आश्‍चर्य की बात है कि राहु का नक्षत्र स्‍वामी सूर्य 12 घर के स्‍वामी बुध के नक्षत्र में छठे घर में बैठा है जोकि वैवाहिक जीवन के लिए अच्‍छा नहीं होता। यह सत्‍य है कि राहु सूर्य के द्वारा 6-12 से जुड़ा हुआ है लेकिन वह 2-7-11 भावों के लिए मजबूत है। ग्रहों के 6-12 से संबंधित होने पर दोनों के बीच अलगाव की स्थिति उत्‍पन्‍न हो सकती है। लेकिन ग्रहों के 2-5-7-11 भावों से जुड़ने पर दोनों फिर से एकसाथ आ जाएंगें।

इनका विवाह केतु-शनि-गुरु के अंतराल में हुआ है। केतु 7-11 भाव का नक्षत्र स्‍वामी है। ये ध्‍यान रखना चाहिए कि जब किसी भाव के नक्षत्र या उपनक्षत्र में कोई ग्रह नहीं होता तो उनकी दशा अथवा अंतर में वे बहुत प्रभावशाली हो जाते हैं। अत: यहां केतु की महत्‍वपूर्ण भूमिका होगी।

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शनि स्‍वनक्षत्र में दूसरे भाव में विराजमान है। आगे चलकर सातवें घर में मंगल की इस पर दृष्टि होगी। वह ग्‍यारहवें भाव में उपस्‍वामी भी रहेगा। अत: वह 2-11 भावों में प्रबल रहेगा। शनि की दृष्टि ग्‍यारहवें भाव पर पड़ रही है जोकि राहु की दशा के दौरान विवाह में देरी करेगा।

मंगल के नक्षत्र और उपनक्षत्र में सूर्य के गोचर के समय विवाह के योग बन सकते हैं। गुरु, चंद्रमा नक्षत्र में है और राहु उपनक्षत्र में है, केतु राहु के नक्षत्र में है और शनि के घर में शुक्र उपनक्षत्र में है।

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