हिन्दू धर्म में ओम का अत्यधिक महत्व है। संसार के कण-कण में ओम की ध्वनि व्याप्त है। तीन अक्षर से बने ओम की शक्ति अपरम्पार हैं, ब्रह्मा, विष्णु, महेश इस महाशक्तिशाली मंत्र का हमेशा जाप करते हैं। इस मंत्र में ब्रह्मा,विष्णु, महेश की शक्तियां समाहित हैं। प्रलय नाद हो या जीवन की शुरुआत इस परब्रह्म शब्द की शक्ति के द्वारा ही सम्भव हैं।
सम्पूर्ण जगत ओम मय है …
महाविस्फोटक शब्द हो अथवा निशब्द ओम की ध्वनि का कलरव हमेशा बहता रहता है। ओम सभी मंत्रों में मंत्रराज और वेदों का सार है। हाल ही में यूरोपियन स्पेस एजेंसी और नासा की संयुक्त प्रयोगशाला सोहो ने संयुक्त रूप से सूर्य से निकलने वाली ध्वनि का अध्ययन किया। काफी समय के रिसर्च पश्चात वें इस निष्कर्ष पर पहुंचे की ये ध्वनि हिंदू धर्म के ओम की भांती हैं।
महाशक्तिशाली है ओम…
ओम की शक्ति परमाणु बम से हजारों गुणा शक्तिशाली है। इसकी शक्ति को पहचाने पर कुछ भी असम्भव नही रह जाता। कुछ समय पूर्व रुस के ध्वनि विशेषज्ञों ने अपनी रिसर्च में दावा किया था कि यदि ओम का उच्चारण विशेष फ्रिक्वेन्शी के तहत किया जाये तो सिर्फ कांच ही नहीं वरण पत्थर की दीवार में भी दरार उत्पन्न हो सकती हैं।
ओम से होते हैं अनेक रोग शांत…
भारत में प्राचीन समय से ही ओम मंत्र का प्रयोग अनेक रोगों के समाधान के लिये होता आ रहा हैं। भारतीय चिकित्सक व आयुर्वेदाचार्य ओम की ध्वनि से पूर्णत: परिचित थे, ओम का प्रयोग सर दर्द, ब्लड प्रेशर, अपच, विस्मृति, क्रोध, तनाव, पेट व हृदय से सम्बंधित समस्त रोग, श्वसन रोग, और मानसिक रोगों के लिये किया जाता हैं। इस प्रयोग से रोगी बिना किसी दवाई के ही कुछ समय में स्वस्थ हो जाता हैं।
ओम का आध्यत्मिक महत्व…
हिंदू धर्म में ओम का महत्व अत्यधिक हैं। जो ओम का उच्चारण नित्य करता है, वो सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इस मंत्र के द्वारा सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। किसी भी मंत्र के प्रारम्भ एवं अंत में ओम का प्रयोग करने से मंत्र के कीलन व अन्य दस दोष नष्ट हो जाते हैं। ओम परम शांति व मोक्षदायक मंत्र हैं।
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