गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णु र्गुरूदेवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को वेदों के ज्ञाता वेदव्यास का जन्म हुआ था। वैसे तो भारत की भूमि पर कई महापुरुष ज्ञानियों ने जन्म लिया लेकिन हिंदू धर्म में वेदव्यास जी को सर्वश्रेष्ठ गुरु का पद दिया गया है।
इस दिन आषाढ़ के पूर्णिमा का चांद चारों और अपनी रोशनी बिखेरता है। इसी तरह गुरु भी अपने ज्ञान की रोशनी अपने शिष्यों में बांटता है। इस कारण गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है।
इस दिन वेदों के ज्ञानी वेदव्यास का जन्म हुआ था इसलिए माना जाता है कि इस दिन किसी भी काम की शुरुआत करने से उसमें अवश्य ही सफलता मिलती है।
जो विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर हैं वे गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु को कोई उपहार भेंट में दें एवं किसी जरूरतमंद बच्चे को पुस्तकें दान में दें।
गुरु पूर्णिमा के दिन पूजन करने से आपकी ख्याति और मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होती है।
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