1.पांचवें घर में सूर्यः पांचवें घर का सूर्य जातक को ह्रदय से संबंधित बीमारी प्रदान करता है। जातक को निर्जन स्थान जैसे पर्वतारोहण पर भ्रमण करने में आनंद मिलता है। आर्थिक स्थिति तो अच्छी रहती है लेकिन उम्र कम होती है। संतान के सुख से भी वंचित रहना पड़ सकता है या फिर यदि संतान की प्राप्ति हुई तो बहुत ही मुश्किल से होती है।
2.पांचवें घर में चंद्रमाः निष्ठावान, बुद्धिमान और भगवान से डर कर सभी काम करने वाला। अधिकारी के रूप में राज्य या देश की सेवा करेगा। किसी भी विषय पर जातक के विचार बिल्कुल स्पष्ट होंगे। बच्चों के साथ जातक को आनंद की प्राप्ति होगी। जीवन में जमीन, आभूषण और कीमती रत्न आदि की खरीदारी करेगा।
3.पांचवें घर में मंगलः पांचवें घर में मंगल की स्थिति जातक को प्रशासनिक विभाग से जुड़ा काम दिलाती है। जातक उदास रहने वाला और हठी स्वभाव का होगा। पेट दर्द की परेशानी बनी रहेगी। संतान की तरफ से जातक को सुख की प्राप्ति नहीं होगी। काम वासना की अधिकता के कारण स्वास्थ्य में गिरावट रहेगी साथ ही इस कारण मृत्यु भी हो सकती है। महिला जातक को प्रसव के समय बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
4. पांचवें घर में बुधः रोमांटिक स्वभाव और यौन क्रिया में लिप्त रहने की चाहत रखने वाला। बुद्धिमान और मजाकिया स्वभाव। ऐसे जातक अपनी बुद्धि से सफलता पाने वाले और ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले होते हैं। राजनेता या सलाहकार जैसे पद पर आसीन हो सकते हैं। जीवन सुखमय व्यतीत होता है।
5.पांचवें ग्रह में शुक्रः जातक को पुत्री अवश्य होती है साथ ही कई संतानों का सुख प्राप्त होता है। बहुत सारे मित्र होंगे। कवि, गीतकार, गायक, संगीतकार या अभिनेता के रूप में करियर बनाएगा। सरकार की तरफ से पुरस्कृत होगा। सट्टेबाजी, लॉटरी और स्टॉक मार्किट से आमदनी होगी।
6.पांचवें घर में गुरुः दोस्त अच्छे मिलेंगे। प्रभावशाली व्यक्तित्व के सलाहकार आदि के रूप में करियर बनाएगा। संतान और वाहन का सुख मिलेगा। तंत्र-मंत्र आदि विद्या का भी जानकार होगा।
7.पांचवें घर में शनिः वैवाहिक जीवन का सुख नहीं मिलेगा। सगे-संबंधी पसंद नहीं करेंगे। अकेला जीवन गुजर-बसर करने वाला होगा। क्रूर और तुच्छ मानसिकता होगी। गरीबी में जीवन बसर करेगा। दूसरे इसे नापसंद करेंगे।
8.पांचवें घर में राहुः पेट से संबंधित गंभीर बीमारी से परेशान रहेगा। जातक को प्रायः लोग गलत ही समझेंगे। दोस्तों की कमी रहेगी। ह्रदय संबंधी बीमारी होगी। संतान की मृत्यु जल्द या तो बाद में होगी।
9. पांचवें घर में केतुः संतान की संख्या कम होगी। एसिडिटी या पेट में ट्यूमर की शिकायत रहेगी। अध्यात्म की तरफ जातक का झुकाव रहेगा।
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