ज्योतिषशास्त्र में जिस तरह बृहस्पति को देवताओं के गुरु की संज्ञा दी गई है। ठीक उसी तरह शुक्राचार्य असुरों के गुरु माने जाते हैं। शुक्र और गुरु एक समान ही ज्ञानी हैं लेकिन दोनों में फर्क यह है कि गुरु के प्रभाव से जातक धार्मिक प्रवृति में अधिक लिप्त रहता है तो कि शुक्र के प्रभाव से इंसान के अंदर भौतिकता की प्रवृति में बढ़ोतरी होती है और भौतिक जीवन की चाहतपूर्ति के कारण जातक गलत काम भी करने से परहेज नहीं करते |
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सतयुग में देवताओं से युद्ध के समय जब-जब असुर मृत्यु को प्राप्त होते थे तब शुक्राचार्य अपनी संजीवनी विद्या द्वारा उन असुरों को दोबारा जीवित कर दिया करते थे। मध्यम आकार का शरीर, लंबे हाथ, चौड़ी छाती, स्वस्थ कंधे और घुंघराले बाल, पुरुषात्व के स्वामी, सुंदर व्यक्तित्व और कामुक प्रवृति शुक्राचार्य के व्यक्तित्व की खास पहचान है।
गुरु शुक्राचार्य बहुत बुद्धिमान थे और हर समय ज्ञान की बातों को सीखने की कोशिश करते रहते हैं। कहते हैं कि शुक्राचार्य को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त था कि सौरमंडल में जब-जब शुक्र का उदय होगा तब-तब ही संसार में शुभ रस्में निभाई जाएगी। स्त्री जाति ग्रह शुक्र मनुष्य के अंदर की शक्ति, पारिवारिक जरूरतों की पूर्ति को प्रदर्शित करता है। मानवीय संबंधों में शुक्र पत्नी और शरीर के अंदर गर्भ और प्रजनन अंगों का प्रतिनिधित्व करता है। सौरमंडल में स्थित ग्रहों के बीच शुक्र की स्थिति एक मंत्री या सलाहकार जैसी है। जो एक को दूसरे से मिलाने वाला और चीजों को गतिशील रखने रखने का काम करता है।
सूर्य और चंद्रमा के बाद चमकरदार ग्रह में तीसरा नंबर शुक्र का ही आता है। राशियों में वृषभ और तुला का प्रतिनिधित्व शुक्र के पास है। मीन राशि में यह उच्च का और कन्या राशि में नीच का होता है।
मानव का निरंकुश स्वभाव या फिर भावुकता शुक्र के प्रभाव के कारण ही जातक के अंदर पनपता है। शुक्र प्रधान जातक अधिकतर विलासिता पूर्ण जीवन जीते देखे जाते हैं हैं या उनमें इसकी चाह बहुत अधिक होती है |
कुंडली में शुक्र की प्रतिकूलता के कारण जातक को व्यवसाय में हानि, गरीबी और कर्ज, परिवार में वैमनस्यता, दामपत्य जीवन में खटास, तलाक, कामुक प्रवृति, वाहन अथवा शरीर से संबंधित क्षति जैसी परेशानियों से सामना करना पड़ता है।
वीर्य या अन्य प्रकार के यौन अंग शुक्र के प्रभावक्षेत्र में आते हैं।
जिन जातकों पर शुक्र का विशेष प्रभाव हो उनमें विपरीत लिंगों को आकर्षित करने की गजब की क्षमता होती है। इंसान का स्मार्टनेस और उसके चेहरे की सुंदरता, आशावाद प्रकृति या फिर कलात्मकता शुक्र की कृपा से ही जातक को प्राप्त होती है। शुक्र के प्रभाव से जातक मधुर वाणी का स्वामी और दयालु स्वभाव का होता है।
यौनांग, वीर्य, गर्दन या गर्दन के आस-पास के क्षेत्र, नसों पर शुक्र का प्रभाव होता है। नारी या अन्य किसी प्राणियों की प्रजनन क्षमता को शुक्र ही प्रभावित करता है। यौन संबंध या अधिक शराब पीने से हुई बीमारी शुक्र की देन होती है। विटामिन ई, नियासिन और कॉपर पर शुक्र का प्रभाव होता है। कला से संबंधित तमाम क्षेत्र, मनोरंजन, सौंदर्य की वस्तुएं, महंगी चीजें, मिठाई आदि पर शुक्र का आधिपत्य होता है।
साज-सज्जा, आभूषण, बहुमूल्य रत्न, महंगी वस्तुएं, आयकर विभाग, वाणिज्य विभाग, वित्त विभाग, बैंक, जज, लकड़ी विक्रेता, नाई, हेयर स्टाइलिस्ट, विग मेकर, टेलर और ड्रेस निर्माण कार्य शुक्र के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं।
राजकीय जानवर जैसे हाथी, घोड़ों पर शुक्र का प्रभाव होता है। सुंदर और रंगबिरंगी तितलियों शुक्र के प्रतिनिधित्व में आती हैं। फूलों के पौधे या साज-सज्जा के काम में आने वाले पौधे शुक्र के क्षेत्र में आते हैं। विवाह स्थल, फूल, नर्सरी, कार्यालय, वैसी कंपनियां जो सुगंधित वस्तुएं बनाती हैं उनकी फैक्ट्रियां और मनोरंजन कार्य के लिए उपयोग में लाया जाने वाले भवन पर शुक्र का ही आधिपत्य रहता है।
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