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मूंगा रत्न जीवन की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम, जानिए इसे धारण करने के नियम, विधि और लाभ

भारतीय वैदिक ज्योतिष के अनुसार मूंगा मंगल ग्रह का बहुत ही प्रभावशाली और ऊर्जा प्रदान करनेवाला रत्न है। प्राचीन काल से ही मंगल ग्रह को युद्ध का देवता माना गया है। मंगल हमारी लड़ने की क्षमता और आक्रामकता को दर्शाता हैं। किसी भी व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनाने का कार्य करता हैं मूंगा। सौरमंडल में स्थित नौ ग्रहों मेंमंगल ग्रह सबसे आक्रामक ग्रह है। यह रत्न बेहद सुंदर चित्ताकर्षक सुंदर रंग का होता हैं।

मूंगा किसे धारण करना चाहिए

जिन लोगों की कुंडली में मंगल पापी होकर अशुभ फल दे रहा होता हैं, उसे नियंत्रित करने के लिए मूंगा धारण करना चाहिए। जो लोग पुलिस, सेना, फ़ौज में जाना चाहते है उनके लिए मूंगा किसी वरदान से कम नहीं है। मेष, वृश्चिक, सिंह, धनु व मीन राशि वाले लोगों को मूंगा धारण करना चाहिए। वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी बतलाया गया हैं और मंगल मकर राशि में उच्च का होता हैं। इस रत्न को अगर सही तरह से और सही परिस्थिति में धारण किया जाए तो ये आपका जीवन बदल सकता है।

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 मूंगा पहनने के लाभ

  • मंगल ग्रह युद्ध का देवता है इसलिए शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए मूंगा धारण किया जाता है, इससे आनेवाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है और हिम्मत तथा साहस में वृद्धि होती है।
  • मूंगा आपके अंदर नेतृत्व क्षमता का विकास करता है और आप जीवन की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनते हैं।
  • व्यक्ति के पराक्रम को बढाने के लिए मंगल ग्रह कारक होता हैं। इसी के चलते पराक्रम को बढाने के मूंगा धारण करना चाहिए।
  • उदासी व मानसिक अवसाद पर काबू पाने के लिए मूंगा रत्न अवश्य धारण करना चाहिए।
  • मूंगा रत्न पारिवारिक कलह को समाप्त कर परिवार में परस्पर संबंधों में मधुरता स्थापित करने का कार्य करता है।
  • यदि किसी व्यक्ति को रक्त से सम्बन्धित कोई दिक्कत है तो उसे मूंगा पहनने से फायदा मिलता है।
  • इस रत्न के प्रभाव से मनोबल में वृद्धि होती है, इच्छाशक्ति को पुनर्जीवित करने में मूंगा मदद करता है तथा मन में उत्पन्न भय का खात्मा करता है।
  • मूंगा सांप और बिच्छू के विष के प्रभाव को कम करता है या सर्पदंश और बिच्छू के डंक से रक्षा करता है।
  • मंगल ग्रह की पीड़ा को शांत करने के लिए और जातक के अंदर साहस जागृत करने के लिए मूंगा धारण किया जाता है।

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मूंगा धारण करने की विधि और नियम

मूंगा सोने या तांबे की धातु में धारण करना बहुत अच्छा होता है। मूंगा अपने वजन के हिसाब से धारण करना चाहिए, सव्वा पांच रत्ति से कम मूंगा नहीं पहनना चाहिए। मूंगा रत्न को गाय के दूध या गंगाजल में पूरी रात डूबाकर रखें। ऐसा करने से रत्न की सारी अशुद्धियां दूर हो जाती हैं। धारणकर्ता लाल रंग के आसन पर बैठें और मूंगा रत्न जड़ित अंगूठी लाल कपड़े पर रखें। इस कपड़े पर कुछ पुष्प भी रखें और अगरबत्ती जलाएं। मूंगा धारण करने से पहले अपने कुलदेवता तथा मंगल देव को याद करते हुए 108 बार मंगल के बीज मन्त्रों का जाप करते हुए दाहिने हाथ की अनामिका अंगूली में मंगलवार के दिन धारण करना लाभदायक होता है।

मंगल का बीज मन्त्र – ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

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