मिथुन राशि के व्यक्तियों का स्वाभाव मधुर व प्रेम से भरा हुआ होता हैं। वाणी और शब्दों के ये जादूगर होते हैं। इस राशि के जातक अधिक समय तक बात को छुपा नही सकते अत: प्रेम प्रदर्शन हो या आंतरिक सम्बंधों की पहल शुरुआत ये ही करते हैं। ये अपने साथी की प्रत्येक इच्छा पूरी करने का प्रयास करते हैं। ये रोमांटिक होते हैं, रोमांस को छुपाते नहीं हैं चाहे वो पब्लिक पैलेस हो या धार्मिक।
द्विस्वाभाव राशि के होने के कारण ये किसी भी माहौल के अनुसार अपने को ढाल लेते हैं। गंगा गये तो गंगा दास यमुना गये तो यमुनादास वाली उक्ति इन पर चरित्रार्थ होती है। ये अपने स्वाभाव से तनाव भरे माहौल को भी प्रसन्नतामय माहौल में बदल देते है।
मिथुन राशि जातकों पर मेष व वृषभ राशि के मिले जुले प्रभाव देखने को मिलते है। इनके मस्तिष्क में सेक्स के कीडे हमेशा दौडते रहते हैं, साथी के हां करने की देर होती हैं और ये तैयार। ये सेक्स को हमेशा अलग अंदाज में करना पसन्द करते हैं। सम्भोग से पूर्व उछलने, कूदने या नाचनें के विशेष शौकीन होते हैं। इस राशि के जातक सम्भोग के दौरान बार-बार आसन परिवर्तन करते है। ये सम्बंधों के दौरान अधिक चंचल होते है। अधिक बातें करते हैं या आवाज निकालते हैं। इस राशी जातकों की उत्तेजना गले व मुहं के निचले हिस्से में होती है।
बुध इस राशि का स्वामी होता है। पुरुषों के गुप्तांग अधिक कठोर नही होती तथा इस राशि की स्त्रियां अपने पार्टनर का ज्यादा देर तक साथ नही दे पाती, बहुत जल्दी छटपटा जाती हैं। बुध के कारण इस राशि के कुछ जातक अपने साथी को पूर्ण सुख देने में असमर्थ होते है।
ये अधिकतर इस शंका में रहते है की कहीं इनका पार्टनर इनसे दूर न चला जाये। इसलिये इस राशि के जातक अधिक शक करते है। इसका कारण मिथुन राशि वालों की कुछ कमियां व हीन भावना होती है। ये सम्बंध बनाते समय कई भाव-भंगिमा का प्रयोग करते है। अधिकतर इमोशनल माहौल को बनाते है। कब कौन से भाव अभिव्यक्ति करनी है ये अच्छी तरह से जानते हैं। हसना, रोना, रूठना व मनाना इन सब कलाओं में मिथुन राशि जातक पारंगत होते है।
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