पारूल रोहतगी
वैदिक ज्योतिषाचार्य
हिंदू संवत् के अनुसार प्रत्येक महीने की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए भक्त एकादशी का व्रत रखते हैं। वैष्णव और हिंदू धर्म के लिए एकादशी व्रत अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। एक माह में दो एकादशी व्रत होते हैं जिसमे से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है।
एकादशी के दिन श्रद्धालु कठोर उपवास रखते हैं और अगले दिन सूर्योदय के बाद ही उपवास समाप्त करते हैं। एकादशी उपवास के समय सभी तरह के अन्न का भोजन करना वर्जित होता है। आइए जानते हैं एकादशी व्रत की विधि के बारे में -:
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नारदपुराण में उल्लिखित है कि एकादशी व्रत भगवान विष्णु को अति प्रिय है। एकादशी व्रत के लिए दशमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए तथा रात को पूजा स्थल के समीप सोना चाहिए। अगले दिन उठकर (एकादशी) प्रात: स्नान के बाद व्यक्ति को पुष्प, धूप आदि से भगवान विष्णु की पूजा करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए :
एकादशी निराहारः स्थित्वाद्यधाहं परेङहन।
भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं में भवाच्युत।।
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पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात को भगवान विष्णु की श्रद्धाभाव से आराधना करनी चाहिए। इसके बाद द्वादशी के दिन सुबह उठकर स्नान कर भगवान विष्णु को भोग लगाकर पंडित को भोजन करने के बाद स्वयं अन्न ग्रहण करना चाहिए।
सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा पाने के इच्छुक भक्तों को दोनों दिन एकादशी व्रत करने की सलाह दी जाती है।
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