गोलाकार और अर्ध चन्द्र जैसा दिखने वाला एकमुखी रुद्राक्ष बहुत ही पवित्र माना जाता है। एकमुखी रुद्राक्ष शक्ति, ऊर्जा, सत्य और मोक्ष का प्रबल स्रोत माना जाता है । एकमुखी रुद्राक्ष साक्षात शिव स्वरुप ही है। यह रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ है तथा इस रुद्राक्ष में साक्षात महादेव निवास करते है। इस रुद्राक्ष का स्वामी सूर्य ग्रह होता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्यक्ति स्वयं को भगवान शिव से जुड़ा हुआ पाता है।

एकमुखी रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व
रुद्राक्षों में एकमुखी रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। धर्म-शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है की एकमुखी रुद्राक्ष साक्षात शिव भगवान का अवतार है। इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट व संकट दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही एकमुखी रुद्राक्ष व्यक्ति के जीवन के अन्धकार को दूर कर उसमे प्रकाश को भरता है। मात्र इतना ही नहीं इस रुद्राक्ष को पहनने से ब्रह्म ह्त्या के समान पापों से भी मुक्ति मिलती है और व्यक्ति मोह माया के जाल से ऊपर उठ जाता है। यह अचूक धन प्राप्ति के लिए भी उत्तम माना गया है। इसके धारण करने से जातक चिंतामुक्त और साहसी, निडर हो जाता है। शत्रु भय से मुक्त हो जाता है। यह रुद्राक्ष मनोबल को बढाता है।
एकमुखी रुद्राक्ष और ज्योतिष
यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो अथवा अस्त हो तो एकमुखी रुद्राक्ष को धारण करना लाभदायक होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार एक मुखी रुद्राक्ष का स्वामी सूर्य है। इसी कारण एकमुखी रुद्राक्ष को धारण करनेवाले व्यक्ति के अंदर उर्जा, शक्ति और नेतृत्व क्षमता का निर्माण होता है। इसे धारण करने के बाद व्यक्ति का भाग्योदय होता है। समाज में प्रसिद्धि मिलती है। अगर किसी जातक की कुंडली में किसी क्रूर ग्रह की दशा या अन्तर्दशा चल रही है तो भी एकमुखी रुद्राक्ष को पहनना उचित होता है। इसके धारण करने से जातक चिंतामुक्त और साहसी, निडर हो जाता है। शत्रु भय से मुक्त हो जाता है।
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एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने के नियम तथा विधि
- एकमुखी रुद्राक्ष धारण करनेवाला व्यक्ति सदाचार का पालन करनेवाला होना चाहिए।
- एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति की भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था होनी चाहिए।
- मांस-मदीरा या अन्य नशे की वस्तुओं से दूर रहना चाहिए।
- रविवार, सोमवार अथवा शिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष को धारण करना शुभ होता है।
- रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें।
- प्रातःकाल में सूर्य को ताम्बे के लोटे से जल चढ़ाएँ।
- रुद्राक्ष को जागृत करने के लिए“ॐ ह्रीं नमः” मंत्र का उच्चारण 108 बार करें।
एकमुखी रुद्राक्ष के लाभ
मनोबल में वृद्धि
जो जातक अपने लक्ष को प्राप्त करने में असमर्थ होते है तथा उनके अंदर साहस की कमी होती है, मनोबल हमेशा गिरता है ऐसे लोगों को एकमुखी रुद्राक्ष को पहनना उचित होता है। इसके धारण करने से जातक चिंतामुक्त और साहसी, निडर हो जाता है। शत्रु भय से मुक्त हो जाता है। यह रुद्राक्ष मनोबल को बढाता है।
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आध्यात्मिक विकास
एकमुखी रुद्राक्ष को धारण करने के बाद धारण करने वाले व्यक्ति की आध्यात्मिक इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मन को शांति मिलती है। इस रुद्राक्ष के प्रभाव से मस्तिष्क में गलत भावनाएं उत्पन्न नहीं होती, व्यक्ति ईश्वर की शरण में जाता है, धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ती है, जीवन सुखमय और आध्यात्म की ओर अग्रसर होता है।
करियर में सफलता
इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इसे धारण करने के पश्चात करियर की चिंता से मुक्ति मिलती है, करियर बनाने में यह रुद्राक्ष अपने आप ही हमारा मार्ग प्रशस्त करता है, हमें मार्गदर्शन करता है। एक मुखी रुद्राक्ष करियर तथा व्यवसाय में सफलता दिलाने में सहायक होता है। प्रशासनिक कार्यों में किसी तरह की रूकावटे आ रही हो तो, एकमुखी रुद्राक्ष पेंडेंट के प्रभाव से वो रुकावटें अपने आप समाप्त होंगी।
धन-संपत्ति में वृद्धि
इस रुद्राक्ष में धन को चुम्बक की तरह अपनी ओर खींचने का गुण है, जो जातक इस रुद्राक्ष को धारण करता है उसे कामकाज में अच्छा धन-लाभ होता है। मान सम्मान के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है। एक मुखी रुद्राक्ष में दैवीय शक्ति समाहित होती है जिनका लाभ मनुष्य को मिलता है। इसलिए बिना संकोच इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए।
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2 mukhi rudraksha original k bare main btaye. ???Om Namah Shiwaye.