धनतेरस एक ऐसा पर्व है जब भारतीय बाज़ारों में खूब चहल-पहल होती है । धन तेरस के आगमन से चारो तरफ । खुशिया फैल जाती हैं लोग, उनके घर, दुकान, बजार आदि चारो तरफ रंगीन रौनक दिखाई देती हैं । हर साल कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को यह पर्व मनाया जाता हैं । इस दिन धन की देवी लक्ष्मी की, औषधि के देवता धन्वंतरि तथा मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान हैं ।
महर्षि धन्वंतरि आयुर्वेद व स्वस्थ जीवन प्रदान करने वाले देवता के रूप में पूजनीय है, धन-वैभव के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं, उसी प्रकार लम्बी उम्र के लिए मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। धनतेरस की सायंकाल को यमदेव निमित्त दीपदान किया जाता है। ऐसा करने से यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है। मान्यता है कि यदि गृहलक्ष्मी इस दिन दीपदान करें तो पूरा परिवार स्वस्थ रहता है तथा रोग व अकाल मृत्यु जैसे कष्ट खत्म हो जाते हैं ।
इस दिन पीतल और चाँदी खरीदने चाहिए क्योंकि पीतल भगवान धन्वंतरी की धातु है। पीतल खरीदने से घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्यलाभ प्राप्त होता है। व्यापारी वर्ग इस दिन नए बही-खाते खरीदता है और इन्हें गद्दी पर स्थापित करते है। तत्पश्चात् दीवाली पर इनका पूजन किया जाता है। लक्ष्मीजी के आह्वान का भी यही दिन होता है। धन तेरस की पौराणिक कथाये अलग अलग हैं जैसे –
यम देव ने बताया था अकाल मृत्यु से बचने का उपाय….
एक दंत कथा के अनुसार किसी समय हेम नामक एक राजा थे। दैव कृपा से उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। लेकिन बच्चे के लिये भविष्य वाणी थी कि विवाह के चार दिन पश्चात बच्चे कि म्रृत्यु हो जायेगी । । बच्चे ने बडे होकर एक राजकुमारी से गंधर्व विवाह किया । विवाह पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा यमदूतो ने तुरंत यमराज जी से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु के लेख से मुक्त हो जाए। तब यम देवता ने कहा कि जो प्राणी कार्तिक मास में त्रयोदशी की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखेगा उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी । इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगन मे यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं। इस दिन लोग यम देवता के नाम पर व्रत भी रखते हैं।
इस दिन भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश के साथ अवतरित हुए थे….
धार्मिक व पौराणिक मान्यता है कि आज ही के दिन सागर मंथन के समय औषधी के देवता भगवान धन्वन्तरि अवतरित हुए थे। भगवान विष्णु के अंश से भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था. । भगवान धनवंतरी सागर मंथन के समय सोने का अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे । उनके कलश लेकर प्रकट होने की घटना के प्रतीक स्वरूप ही बर्तन खरीदने की परम्परा का प्रचलन हुआ। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन धन (चल या अचल संपत्ति) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। धन तेरस के दिन ग्रामीण धनिये के बीज भी खरीदते हैं। दीवाली के बाद इन बीजों को वे अपने खेतों में बो देते हैं। देश के कुछ ग्रामीण इलाकों में इस दिन लोग अपने पशुओं की पूजा करते हैं। इसके पीछे वजह यह है कि पशुओं को वे अपनी आजीविका चलाने का सबसे महत्वपूर्ण साधन मानते हैं।
पूजन विधि – धनतेरस के दिन यमुना स्नान करके, यमराज और धन्वन्तरि का पूजन-दर्शन कर यमराज के निमित्त दीपदान करना चाहिए, आटे का दीपक बनाकर घर के मुख्य द्वार पर रखा जाता हैं इस दीप को जमदीवा अर्थात यमराजका दीपक कहा जाता है।.रात को घर की स्त्रियां दीपक में तेल डालकर नई रूई की बत्ती बनाकर, चार बत्तियां जलाती हैं। दीपक की बत्ती दक्षिण दिशा की ओर रखनी चाहिए। दीपदान करते समय इस मंत्र को पढ़ना चाहिए-
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति।।
इसके पश्चात महा लक्ष्मी की पूजा विधि विधान पूर्वक करे ।
पूजन समय – प्रदोष काल:- शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 मिनट की अवधि को प्रदोषकाल कहते हैं। इस काल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना अति शुभ माना जाता है। इस समय पूजा करने से घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
दीपदान व पूजन काल – 16:57 से 18:49
अवधि = 1 घण्टा 51
प्रदोष काल = 16:35 से 19:19
वृषभ काल = 16:57 से 18:49
धनतेरस का महत्व
धनतेरस पर घर में नई चीजों को लाना बहुत शुभ माना जाता है। लोग कैलेंडर के अनुसार शुभ मुहूर्त के दौरान लक्ष्मी पूजा करते हैं। कुछ स्थानों पर सात अनाज (गेहूं, चना, जौ, उड़द, मूंग, मसूर) की पूजा की जाती है। माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान सुनहरा फूल और मिठाई अर्पित की जाती हैं। लोग नए बर्तन खरीदते हैं, वस्त्र लेते हैं, लक्ष्मी-गणेश पूजन करते हैं । धनतेरस पर कुछ न कुछ जरूर खरीदना चाहिये । ऐसी मान्यता है कि इस दिन नई वस्तु का आगमन प्रसन्नता वा खुशिया देता हैं । यह त्यौहार सभी लोगों के जीवन में एक बड़ी भूमिका निभाता है। यह सभी के लिए एक बहुत खुशी, धन, समृद्धि, बुद्धि और सकारात्मक सोच लाता हैं । लोग अपने आस पास से बुरी ऊर्जा और आल्स्य को हटाने के लिये सभी वस्तुओं को साफ करते है । व प्रकाश से अपने घर को प्रकाशित करते हैं ।
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