सुनेहला जिसे अंग्रेजी में सिट्रिन कहते है, यह एक प्रभावशाली रत्न है। यह रत्न पीले रंग का पूर्ण पारदर्शक तथा नरम रत्न होता है। यह रत्न पुखराज का ही उपरत्न है, इस रत्न का सम्बन्ध गुरु ग्रह से होता है। बृहस्पति यानि की गुरु की कृपा पाने के लिए ही सुनेहला धारण किया जाता है। सुनेहला रत्न गुरु ग्रह का सबसे प्रमुख और शक्तिशाली उपरत्न है परन्तु जो व्यक्ति महंगे रत्न पहनने में असमर्थ होते है, उनके लिए ही उपरत्न पहनने की सलाह ज्योतिषों द्वारा दी जाती है, इनका मूल्य मूल रत्नों के मुकाबले बहुत ही कम होता है, अतः जिन जातकों की कुंडली में गुरु बलवान होने के बावजूद भी शुभ फल नहीं दे रहे, ऐसे जातकों को गुरु ग्रह को बल प्रदान करने के लिए पुखराज की जगह सुनेहला धारण करने की सलाह ज्योतिषों द्वारा दी जाती है।

जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति बलहीन हो जाते है, उनके लिए सुनेहला धारण करना लाभदायक होता है। बृहस्पति की महादशा तथा अन्तर्दशा में भी सुनेहला धारण करने से लाभ होता है। यह रत्न जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आता है। राजनीति से जुड़े लोग, सरकारी सेवा में कार्यरत तथा कोर्ट-कचेहरी से सम्बन्ध रखने वाले लोगों के लिए यह रत्न बहुत शुभ फल देने वाला होता है।
सुनेहला और धनु तथा मीन राशि का सम्बन्ध
बृहस्पति देव धनु तथा मीन राशि के अधिपति ग्रह हैं, बृहस्पति इस राशि का प्रतिनिधित्व करते है, इसलिए धनु और मीन राशि के लोगों को सुनेहला अवश्य धारण करना चाहिए। इसके प्रभाव से सोचने-समझने की शक्ति में वृद्धि होती है। यह रत्न समाज में मान- सम्मान के साथ सामाजिक कार्यों में भी रूचि बढाता है। धनु और मीन राशि के लोगों के लिए यह रत्न बहुत ही फलदायी होता है।
सुनेहला रत्न के अद्भुत लाभ
अन्याय के विरुद्ध लड़ने में सक्षम
सुनेहला रत्न अन्याय के प्रति लड़ने की ताकद को उजागर करने में मदद करता है। इसके प्रभाव से सोचने-समझने की शक्ति में वृद्धि होती है। मन में जो भी हिचकिचाहट है, उसे दूर करने का काम सुनेहला करता है। यह रत्न उन जातकों के लिए बहुत ही कारगर होता है जो छोटी-छोटी बातों से भयभीत होते है तथा अपने ऊपर हो रहे अन्याय को चुपचाप सहन करते है। इस रत्न का प्रभाव शरीर और मन पर पड़ता है, जिसके कारण जातक अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के योग्य बनता है और उस दिशा में वो मेहनत भी करता है। साहस और हिम्मत को अपने अंदर लाना चाहते है तो निसंकोच सुनेहला धारण करने की सलाह यहाँ आपको दी जाती है।
शौहरत पाने के लिए
सुनेहला रत्न रातों रात शौहरत दिलाने में अहम भूमिका निभाता है। इस रत्न के प्रभाव से जातक एकचित्त होकर कार्य करने में सक्षम होता है तथा उसकी निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। राजनीति से जुड़े लोग, सरकारी सेवा में कार्यरत तथा कोर्ट-कचेहरी से सम्बन्ध रखने वाले लोगों के लिए यह रत्न बहुत शुभ फल देने वाला होता है। इस रत्न के प्रभाव से राजनीति से जुड़े लोग, टीवी सीरियल के कलाकार, फिल्म उद्योग से जुड़े लोग या बड़े-बड़े उद्योगपतियों को धन के साथ साथ फेम भी मिलती है।
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मानसिक शांति के लिए
सुनेहला रत्न को धारण करने के बाद धारण करने वाले व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मन से बुरे विचार दूर हो जाते है। रत्न के प्रभाव से मस्तिष्क में गलत भावनाएं उत्पन्न नहीं होती, व्यक्ति मानसिक शांति हेतु ईश्वर की शरण में जाता है, धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ती है, जीवन सुखमय और आध्यात्म की ओर अग्रसर होता है।
विवाह में बाधक तत्वों से छुटकारा
अक्सर देखा गया है की कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव के कारण तथा गुरु अशुभ भाव में बैठे है, तो विवाह में बाधाएं उत्पन्न होती है, ऐसी स्थिति में सुनेहला धारण करने की सलाह दी जाती है। यह ऐसा रत्न है जो अविवाहित युवक-युवतियां है, जिनकी शादी में देरी होती है या रुकावटें आती है उनकी शादी में आनेवाली रूकावटे दूर करता है और विवाह जल्दी होता है। विवाह में जो भी बाधक तत्व है उनसे छुटकारा पाने के लिए सुनेहला धारण करना चाहिए।
आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए
सुनेहला रत्न के प्रभाव से धन का आगमन होता है, मान सम्मान के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है। जो लोग कर्ज जैसी स्थिति का सामना कर रहे है उन्हें कर्ज से मुक्ति मिलती है, इसमें गुरु देव की शक्ति समाहित होती है, जिनका लाभ मनुष्य को मिलता है। इसलिए बिना संकोच सुनेहला रत्न को अवश्य धारण करना चाहिए। सुनेहला धारण करने के बाद आय के नवीन स्रोत उपलब्ध होते है तथा आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
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