कोर्ट कचहरी और आप ‘ज्योतिषीय विश्लेषण’

न्यायलय में जाने से भला कौन खुश होगा कोर्ट कचहरी व मुकदमे ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ जाने से हर कोई बचना चाहता हैं।लेकिन कुछ परिस्थितिया ऐसी बन जाती हैं जिनके कारण व्यक्ति को न्यायलय जाना पड जाता हैं। कोई व्यक्ति अपने जीवन में कितनी बार और कब कब कोर्ट कचहरी के चक्कर लगायेगा यह जन्म कुंडली में ग्रहो की स्थिति पर निर्भर करता हैं।

मैनें अपने ज्योतिषीय अनुभव में कई बार यह देखा हैं की शुभ ग्रहो की दशा में भी न्यायालय जाना पड जाता हैं भला शुक्र गुरु से ज्यादा शुभ कौन से ग्रह हो सकते हैं लेकिन इन दशाओ मे भी कई जातकों को कचहरी के चक्कर लगाने पडे हैं। दशा से पहले मैं आपको जन्म कुंडली के कोर्ट कचहरी से सम्बंधित योग के बारे में बताता हूँ-

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 भूमि से सम्बधित मुकदमे –

1-यदि जन्म कुंडली का चतुर्थेश एकादश स्थान में हो तथा व्ययेश चतुर्थ स्थान में हो तो उस जातक को भूमि के लिये कोर्ट कचहरी जाना पडता हैं। चतुर्थ स्थान जमीन व भूमि का होता हैं, चतुर्थेश केएकादश में बैठने से वह अपने से अष्टम हो जाता हैं, ज्योतिष शास्त्र मे नियम हैं कि यदि कोई ग्रह अपने स्थान से 6,8,12 में हो तो अपने भाव का शुभ फल नही दे पाता। इसी प्रकार व्ययेश का चतुर्थ भाव में बैठने से चतुर्थ भाव के फलो की प्राप्ति में और भी अधिक कठिनाई आती हैं। जिसके कारण व्यक्ति को विवशता वश कोर्ट जाना पड जाता हैं ।

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2- चतुर्थेस व धनेश व्यय स्थान में शनि के प्रभाव में हो तो भूमि से जुडे मुकदमे होते हैं। शनि व्यय स्थान का कारक होता हैं और जब वह धन स्थान तथा भूमि स्थान के मालिक को एक साथ देखता हैं, तब उसका दोहरा प्रभाव पडता हैंतथा कोर्ट केस की स्थिति पत्रिका में बन जाती हैं।

3- तृतिय भाव का मालिक यदि लग्न या सप्तम भाव में शत्रु राशि में हो तथा चंद्र और चतुर्थेश एकसाथ छठ्वे स्थान में होने से भाइयो के कारण भूमि विवाद होता हैं। कुम्भ, मेष, मिथुन,कन्या,धनु, मीन लग्न में यह स्थिति अधिक प्रबल होती हैं ।

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तलाक के कारण मुकदमे –

1- व्ययेश या षष्ठेश की दशा या अन्तर्दशा हो और सप्तम स्थान का मालिक व्यय स्थान में हो या व्ययेश सप्तम स्थान में हो, तो विवाह को लेकर मुकदमे होते हैं।
22- सप्तम स्थान मे कोई वक्री ग्रह बैठा हो तथा सप्तमेश सूर्य के साथ व्यय स्थान में हो तो तलाक के योग बनते हैं । इस व्यक्ति के दो विवाह हुये लेकिन विफल रहे । दोनो बार तलाक की प्रक्रिया से गुजरना पडा। सप्तमेश का अष्टम स्थान में नीच का होना विवाह सुख से वंचित रखता हैं।

3- मंगल बुध की राशि मे सप्तम स्थान में हो तथा बुध 6,8,12 स्थान में हो तो घरेलु कारणो से मुकदमे के योग बनते हैं ।

लडाई झगडो के कारण मुकदमे-

1- शनि, मंगल का संयुक्तप्रभाव लग्न, तृतिय, सप्तम या व्यय स्थान पर होने से लडाई झगडे की वजह से मुकदमे होते हैं।
2- लग्नेश, तृतियेश व व्यषेश का आपस मे सम्बंध हो तथा राहु की दृष्टि इन पर पड रही हो तो मारपीट या लडाई के कारण कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पडते हैं।

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पैतृक सम्पति के कारण-

राहु का प्रभाव सूर्य तथा चंद्र पर हो तथा दशमेश नीच का हो। तो व्यक्ति पैतृक सम्पति के लिये मुकदमे का सहारा लेता हैं।
2- नवमेश व व्ययेश में राशि परिवर्तन हो तथा सूर्य के साथ शनि या राहु हो व्यक्ति को अपनी ही संतान द्वारा कोर्ट का चक्कर लगाना पडता हैं।

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