अंगारक योग ऐसी अग्नि की तरह है जो एक क्षण में भस्म कर देती है भले ही बाद के परिणाम जो भी हो। यह एक क्षणात्मक आवेश होता है लेकिन इसके परिणाम अत्यधिक विस्फोटक होता है। जिसके जन्म लग्न, तृतिय, सप्तम, दशम स्थान पर अंगारक योग बन रहा हो उसे दूर से ही पहचाना जा सकता है। एक कहावत हैं पूत के पांव पालने में अंगारक योग वाले व्यक्ति के लक्षण जन्म से दिखने शुरु हो जाते है। इस योग वाले जातकों की मातायें यह अवश्य अनुभव करती होंगी की ऐसे बच्चों को दूध पिलाना भी एक टेढी खीर है।
अंगारक योग के दोषकारी प्रभाव-
1- अंगारक योग व्यक्ति के जीवन में हमेशा अग्नि का भय बना कर रखता है। ऐसे जातक कभी प्राकृतिक रूप से तो कभी जानबूझकर अग्नि का शिकार बनते है।
2- अंगारक योग का प्रभाव व्यक्ति को जिद्दी व क्रोधी बनाता है। इस योग वाले जातको से जीतना लगभग मुश्किल ही होता है।
3- इस दोष के कारण व्यक्ति को रक्त सम्बन्धी समस्याये आती है। रक्तचाप, खून का बहना, स्किन प्राब्लम, कील, मुंहासे होते है।
4- अंगारक दोष में दुर्घटना का भय बना रहता है। चोट लगना और खून बहना तो जैसे आम बात होती है।
5- अष्टम स्थान पर बना अंगारक दोष जातक को कई गुप्त बिमारियां देता है। बवासीर या अंडकोश की समस्या से ऐसे जातक परेशान होते है। ऐसे जातकों को दो तीन बार मृत्यु तुल्य कष्ट भी प्राप्त होते है।
6- अंगारक दोष व्यक्ति को अधीर बनाता है सहनशीलता इनके शब्दकोश में होती ही नहीं है। यही अवगुण व्यक्ति को अपने घर परिवार से दूर कर देती है। अधीरता के कारण ही ऐसे व्यक्ति कभी किसी को चोट पहुंचाते है तो कभी खुद को ही। अग्निद्वारा या एसिड द्वारा आत्महत्या करना इसी योग के दुष्परिणाम है।
7- अपराधिक प्रवृति, लडाई झगडा, नशे के शिकार व घर के सुखों से हीन करने वाला यह दोष व्यक्ति को जेल आदि के योग भी बनाता है।
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