ज्योतिषशास्त्र में कुंडली पर ग्रहों के प्रभाव का जातक के जीवन पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। सौरमंडल के प्रत्येक ग्रह का शुभ और अशुभ प्रभाव होता है जो जन्मकुंडली में उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। यहां हम आपको बताते हैं ग्रहों के कुंडली में नीच एवं शत्रु स्थान में होने पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में -:
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सूर्य : सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी, सिरदर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि।
चंद्र : मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, कफ, सर्दी, जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म, निमोनिया।
मंगल : अधिक क्रोध आना, दुर्घटना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, बवासीर, भाइयों से अनबन आदि।
बुध : गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि।
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गुरु : धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास आदि।
शुक्र : वैवाहिक जीवन में मनमुटाव, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरूचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि।
शनि : वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, पैरों में दर्द, नौकरी में परेशानी आदि।
राहु : त्वचा रोग, कुष्ठ, मस्तिष्क रोग, भूत प्रेत वाधा, दादा से परेशानी आदि।
केतु : नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू टोने से परेशानी, रक्त विकार, चेचक आदि।
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