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शंख से जुड़ी यह अद्भुत बातें जरुर जानें

हिन्दू धर्म में युगों-युगों से ही मांगलिक कार्य तथा पूजा-पाठ में शंख बजाने का चलन है। कई लोग अपने घर के पूजा स्थल में शंख रखते है तथा नियमित पूजा-पाठ करने के बाद शंख बजाते है, उसमे से निकलने वाली पवित्र ध्वनि मन को मंत्रमुग्ध करती है। कई लोग शंख के बारे में तो जानते है परन्तु इसमें से निकलने वाली ध्वनि तथा इसके लाभों से अनभिन्न है। दरअसल सनातन धर्म की कई ऐसी बातें है, जो न केवल आध्यात्मिक रूप से बल्कि कई दूसरे प्रकार से भी लाभकारी है, आइये आज इस लेख के माध्यम से आपको शंख से जुड़ी कुछ जरुरी बातों से अवगत कराते है।

शंख की उत्पत्ति

वैसे तो शंख की उत्पत्ति को लेकर पुराणों, भारतीय धर्मशास्त्रों तथा भागवत पुराण में कथाएं है परन्तु भारतीय धर्मशास्रों में शंख का विशिष्ट तथा महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से छठा रत्न शंख था अन्य 13 रत्नों की भांति शंख में भी वही अद्भुत गुण मौजूद है। विष्णु पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका सहोदर भाई है इसलिए यह भी मान्यता है कि जहाँ शंख है वही लक्ष्मी का वास होता है।  

जो लोग शंख की पूजा करते है उन्हें संसार के सारे सुखों की प्राप्ति होती है। शंख की उत्पत्ति के बारे में हमारे धर्म ग्रन्थ कहते है कि सृष्टि आत्मा से और आत्मा आकाश से, आकाश वायु से, वायु आग से, आग जल से, और जल पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है और इन सभी तत्वों से मिलकर शंख की उत्पत्ति मानी जाती है।

शंख के लाभ

  • शंख माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों ही अपने हाथों में धारण करते है इसलिए यह बहुत शुभ माना जाता है।
  • धार्मिक कार्य में शंख बजाने से वहां का वातावरण पवित्र होता है तथा जहाँ तक इसकी आवाज जाती है वहां तक श्रोताओं का मन प्रसन्न होता है तथा मन में धार्मिक भावनाए उत्पन्न होती है।
  • शंख बजने से फेफड़ों का व्यायाम होता है, ऐसा माना जाता है कि अगर कोई श्वास का मरीज नियमित रूप से शंख बजाता है, तो उसे श्वास से सम्बंधित रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए शंख में रखे जल का सेवन करना लाभदायक होता है साथ ही साथ यह दांतों के लिए भी लाभदायक है।
  • शंख में कैल्शियम, फोस्फोरस तथा गंधक के गुण होने की वजह से यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
  • वास्तु शास्त्र के मुताबिक़ शंख में ऐसे गुण होते है, जिससे घर में सकारात्मक एनर्जी आती है मन में प्रसन्नता बनी रहती है।
  • शंख की ध्वनि लोगों को पूजा-अर्चना करने के लिए प्रेरित करती है, ऐसी मान्यता है की इसके प्रभाव से सभी मनोरथ पूर्ण होते है, नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती, रुके कार्य पूर्ण हो जाते है।
  • वैज्ञानिक भी इस बात को मानते है की शंख की आवाज से मौजूदा वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश होता है।
  • शंख वास्तु दोष दूर करता है तथा इसके प्रभाव से घर में अन्न, धन, लक्ष्मी, वैभव की उपलब्धि होती है।

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स्थापना विधि

पुरातन काल से ही प्रत्येक घर में पूजा-वेदी पर शंख की स्थापना की जाती है, पवित्र शंख को दीवाली, होली, महाशिवरात्री, नवरात्रि आदि शुभ मुहूर्त में पूजा पाठ एवं विशिष्ट कर्मकांड के साथ स्थापित करना लाभदायक होता है। गणेश, भगवती, विष्णु भगवान आदि के अभिषेक के समान शंख का भी गंगाजल, दूध, घी, शहद, गुड, पंचद्रव्य आदि से करना चाहिए तथा इसके आगे धूप, दीप, नैवेद्य, से नित्य पूजन करना चाहिए और लाल रंग के आसन पर स्थापित करना चाहिए।

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