किसी की शवयात्रा देखने के बाद जरूर करें ये 3 काम वरना..

अगर जीवन मिला है तो एक दिन मृत्‍यु भी जरूर आएगी। मृत्‍यु एक अटल सत्‍य है जिसे कोई भी नहीं टाल सकता है। अगर आपने धरती पर जन्‍म लिया है तो आपकी मृत्‍यु भी निश्चित है। कहते हैं कि जिस दिन हम जन्‍म लेते हैं उसी दिन हमारी मृत्‍यु की तिथि भी निश्चित हो जाती है।

इस संसार में जन्‍म लेने वाला हर प्राणी नश्‍वर है और उसका नाश जरूर होगा। ऐसा कोई भी जीव नहीं है जो अमर हो और जीवन एवं मृत्‍यु के बंधन से मुक्‍त हो।

शवयात्रा की प्रथा

हर धर्म के लोगों में मृत्‍यु के बाद शवयात्रा निकाली जाती है और ये एक पारंपरिक प्रथा है जो सदियों से चली आ रही है। अकाल मृत्‍यु हो या फिर व्‍यक्‍ति अपनी आयु से मृत्‍यु को प्राप्‍त हो, शवयात्रा को जरूर निकाली जाती है और कहा जाता है कि इससे आत्‍मा को शांति मिलती है।

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मनवांछित फल दे सकती है शवयात्रा

आपको जानकर हैरानी होगी कि शवयात्रा से आप या कोई भी व्‍यक्‍ति मनवांछित फल पा सकता है। इसके लिए बस आपको कुछ आसान सी चीज़ें करनी होंगीं जिनके बाद आप मृत शरीर से भी अपनी कामना की पूर्ति करवा सकते हैं। ये कोई अनैतिक तरीका नहीं है बल्कि शास्‍त्रों में भी इसका उल्‍लेख मिलता है।

शवयात्रा दिखे तो क्‍या करें काम

  • अगर आपको कहीं शवयात्रा दिखाई पड़ती है तो उसे गलती से भी अनदेखा ना करें। उस समय वहां रूक जाएं और अपने दोनों हाथों को जोड़कर प्रणाम करें। जिस भगवान या देवी-देवता को आप मानते हैं उनका नाम स्‍मरण करें। कहा जाता है कि शवयात्रा को देखकर शिव का नाम लेना चाहिए। इससे आपका दिन शुभ रहता है।
  • शवयात्रा निकलते हुए दिख जाए तो उसी समय रूक कर मृतात्‍मा की शांति के लिए ईश्‍वर से प्रार्थना करने पर आपको अपने दुखों से मुक्‍ति मिल सकती है। इस दौरान दो मिनट का मौन भी धारण कर सकते हैं। ऐसा करने से शरीर का त्‍याग कर चुकी आत्‍मा को शांति मिलती है।
  • अगर आप समय के अभाव के कारण किसी परिचित या अनजान व्‍यक्‍ति की शवयात्रा में सम्मिलित नहीं हो सकते हैं तो जब अंतिम यात्रा निकल रही हो तो उस समय रूक जाएं। पहले अंतिम यात्रा को निकलने दें आर उसे रास्‍ता दें। कभी भी अंतिम यात्रा के रास्‍ते में नहीं आना चाहिए।
  • ये बात तो सभी जानते हैं कि जब भी किसी की शवयात्रा दिखाई दे तो मन ही मन राम का नाम जपना चाहिए। श्रीरामचरित मानस के अनुसार मृत्‍यु के पश्‍चात आत्‍मा भगवान शिव में विलीन हो जाती है। तो अब जब कभी भी आपको शवयात्रा दिखे तो भगवान शिव का नाम लें।

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अगर आप किसी वाहन पर हैं और शवयात्रा निकल रही है तो उस समय हॉर्न ना बजाएं और ना ही किसी प्रकार का शोर करें। इसे मृत व्‍यक्‍ति का अपमान समझ जाता है और कम से कम किसी व्‍यक्‍ति के अंतिम समय में तो आप उसे आदर और सम्‍मान दे ही सकते हैं।

दुखों का हो सकता है अंत

शास्‍त्रों की मानें तो अगर अगर आप शवयात्रा के दौरान मृतात्‍मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और अपने ईष्‍ट देव का नाम लेते हैं तो इससे आपके सभी दुख और कष्‍ट भी उस मृत शरीर के साथ नष्‍ट हो जाते हैं। वह मृत शरीर आपके अशुभ लक्षणों को भी अपने साथ ले जाती है।

ब्राह्मण के शव से मिलता है यज्ञ पुण्‍य जितना फल

जी हां, ये बात सच है कि किसी ब्राह्मण के शव को कंधा देने से व्‍यक्‍ति को अपने एक कदम पर एक यज्ञ पुण्‍य का फल मिलता है और केवल एक बार पानी में डुबकी लगाने से उसके सारे पाप धुल जाते हैं। लेकिन अगर कोई अन्‍य ब्राह्मण अपने किसी स्‍वार्थ सिद्धि के लिए किसी ब्राह्मण के मृत शरीर को कंधा देता है तो वह अगले दस दिनों तक अशुद्ध हो जाता है और इन दिनों में वह कोई भी धार्मिक कार्य संपन्‍न नहीं कर सकता है और ना किसी शुभ कार्य में शामिल हो सकता है। शास्‍त्रों में यही नियम बनाए गए हैं।

अंतिम यात्रा में श्‍वेत रंग का महत्‍व

कहते हैं कि सफेद रंग सबसे अधिक पवित्र और सात्‍विक होता है और इसी वजह से अंतिम यात्रा के दौरान मृत शरीर को सफेद रंग के कपड़े में लपेटा जाता है। इसके अलावा मरने के बाद व्‍यक्‍ति के जीवन से सभी रंग मिट जाते हैं और इसलिए भी उसे सफेद रंग के कपड़े में लपेटा जाता है। इसी रंग के साथ मृतात्‍मा इस दुनिया से विदा लेती है।

शवयात्रा के नियम

ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला व्‍यक्‍ति अपने वर्ण के किसी भी व्‍यक्‍ति के मृत शरीर की अ‍र्थी को कंधा नहीं दे सकता है और ना ही किसी अन्‍य वण के व्‍यक्‍ति की शव यात्रा में शामिल हो सकता है। वह केवल अपने माता-पिता और गुरुओं की अर्थी को कंधा दे सकता है। अगर वह किसी ऐसे व्‍यक्‍ति की अर्थी को कंधा देता है तो इससे उसका ब्रहमचर्य खंडित हो जाता है।

किसी भी वर्ण के व्‍यक्‍ति के शव को ले जाते समय आपके मार्ग में गांव अवश्‍य पड़ना चाहिए।

अगर किसी उच्‍च वर्ग के व्‍यक्‍ति के अंतिम संस्‍कार में कोई शूद्र व्‍यक्‍ति लकड़ी या किसी अन्‍य सामग्री को हाथ लगाता है तो इससे मृतात्‍मा प्रेत योनि में हमेशा भटकती रहती है।

शवयात्रा के दौरान आप इन कार्यों को करके और इन नियमों का पालन कर अपने जीवन से सभी कष्‍टों को दूर कर सकते हैं।

किसी भी जानकारी के लिए Call करें :  8882540540

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