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शनि ग्रह की पीड़ा को शांत करने के लिए कौनसे रत्न धारण किये जाते हैं, जानिए जरुर

वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह का बड़ा ही महत्त्व हैं। शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता हैं। शनि नवग्रहों में शक्तिशाली और लम्बे समय तक असर दिखाने वाला बहुत ही प्रभावी ग्रह होता हैं। शास्त्रों के अनुसार शनिदेव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। अगर आपकी कुंडली में शनि से संबंधित कोई दोष बन रहा है, तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। शनि के कुप्रभाव के कारण आप हर तरह से कंगाल हो सकते हैं। यहां तक कि आपके सड़क पर आने के दिन भी आ सकते हैं। यह एक ऐसा ग्रह हैं, जो राजा को भी रंक बना देता हैं।

शनि दोष या शनि ग्रह की पीड़ा की वजह से जीवन के हर क्षेत्र में असफलता मिलती है और सभी प्रयास फेल हो जाते हैं। सभी जानते हैं शनि दोष के कारण जीवन पर क्‍या प्रभाव पड़ता है। जन्‍मकुंडली में शनि दोष के कारण जीवन नरक समान बन सकता है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएँगे कि शनि ग्रह की पीड़ा को शांत करने के लिए कौनसे रत्न धारण किये जाते हैं।

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1- नीलम

शनि ग्रह का रत्न नीलम जिसे अंग्रेजी में ब्लू सफायर कहते है बहुत ही प्रभावशाली रत्न है। ज्योतिष विज्ञान में इसे कुरुन्दम समूह का रत्न कहते है। सबसे अच्छा नीलम भारत में पाया जाता है, इसके अलावा यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, म्यांमार और श्रीलंका की खानों में पाया जाता है। सब रत्नों में सबसे अधिक प्रभावशाली रत्न नीलम होता है। यह रत्‍न शनि देव के शुभ प्रभाव को बढ़ाने में हमारी मदद करता है। शनि की महादशा या अन्तर्दशा हो तब नीलम रत्न धारण करना शुभ माना जाता हैं।

नीलम रत्न की खासियत

  • इस रत्न के प्रभाव से व्यापार में सफलता मिलती है तथा व्यक्ति बहुत जल्दी धनवान बनता है। अगर आप बार बार गलत निर्णय लेते है ऐसे में जीवन को सही दिशा दिखाने का कार्य यह रत्न करता है।
  • नीलम रत्न का प्रभाव बहुत शीघ्रता से दिखाई पड़ता हैं। अगर यह रत्न आपके लिए अनुकूल नहीं हैं, अर्थात इसको धारण करने के बाद आपको नकारात्मक फल मिलते हैं तो आपकी आँखों में तकलीफ होने लगती हैं।
  • शत्रुओं से आपका बचाव होता है तथा दुर्घटना आदि से आपका सामना नहीं होता।
  • भाग्योदय में इस रत्न की अहम भूमिका होती है, इस रत्न को धारण करने के बाद जातक पीछे मुड़कर नहीं देखता जीवन में तरक्की होती है।
  • यह रत्न धारण करने से मानसिक शांति मिलती है। मन में बुरे विचार नहीं आते। क्रोध पर नियन्त्रण रहता है।
  • राजनीति से जुड़े हुए लोगों के लिए यह रत्न धारण करना बहुत फायदेमंद होता है।
  • अगर व्यक्ति के मन में किसी प्रकार का भय है, तो उसे खत्म करने के लिए यह रत्न धारण किया जाता है।यह रत्न पहनने से आलस्य दूर होता है और पोजेटिव फिलिंग आती है।
  • अगर कुंडली में शनि अस्त या वक्री तथा निर्बल हो तो जातक सफलता से दूर चला जाता है अगर आपकी कुंडली में शनि की दशा अनुकूल नहीं है तो आपको नीलम अवश्य धारण करना चाहिए तभी हर क्षेत्र में आपको सफलता मिलेगी।

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2- जामुनिया या कठेला

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जामुनिया नीलम रत्न का ही उपरत्न है। जिसे हम कठेला नाम से भी जानते है, यह बहुत ही प्रभावशाली रत्न है। इसका सम्बन्ध शनि ग्रह से होता है। यह रत्न जामुनी तथा बैंगनी रंग का होने के कारण यह जामुनिया या कठेला के नाम से जाना जाता है, अंग्रेजी में इसको एमेथिस्ट कहते है। यह बैंगनी रंग का पत्थर है, जोकि सेमीप्रीसियस स्टोन्स की कैटेगरी में आता है। शनि के दोषों से छुटकारा पाने के लिए यह रत्न बहुत ही कारगर होता है। यह रत्‍न शनि देव के शुभ प्रभाव को बढ़ाने में हमारी मदद करता है। शनि की महादशा या अन्तर्दशा हो तब इस रत्न को धारण करना शुभ माना जाता है

ज्योतिषशास्त्र में शनि के रत्न नीलम का बड़ा महत्व है, परन्तु इस रत्न का मूल्य बहुत ज्यादा होने के कारण सब जातक इस रत्न को धारण नहीं कर पाते, उनके लिए ही जामुनिया उपरत्न पहनने की सलाह ज्योतिषों द्वारा दी जाती है, इनका मूल्य मूल रत्नों के मुकाबले बहुत ही कम होता है, अतः जिन जातकों की कुंडली में शनि बलवान होने के बावजूद भी शुभ फल नहीं दे रहे, ऐसे जातकों को शनि ग्रह को बल प्रदान करने के लिए नीलम की जगह जामुनिया रत्न से बनी अंगूठी धारण करने की सलाह ज्योतिषों द्वारा दी जाती है।

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जामुनिया रत्न के अद्भुत लाभ

अगर कुंडली में शनि अस्त या वक्री तथा निर्बल हो तो जातक सफलता से दूर चला जाता है अगर आपकी कुंडली में शनि कीदशा अनुकूल नहीं है तो आपको जामुनिया अवश्य धारण करना चाहिए तभी हर क्षेत्र में आपको सफलता मिलेगी।

  • इस रत्न के प्रभाव से व्यापार में सफलता मिलती है तथा व्यक्ति बहुत जल्दी धनवान बनता है।
  • अगर आप बार बार गलत निर्णय लेते है ऐसे में जीवन को सही दिशा दिखाने का कार्य यह रत्न करता है।
  • शत्रुओं से आपका बचाव होता है तथा दुर्घटना आदि से आपका सामना नहीं होता।
  • भाग्योदय में इस रत्न की अहम भूमिका होती है, इस रत्न को धारण करने के बाद जातक पीछे मुड़कर नहीं देखता जीवन में तरक्की होती है।
  • जामुनिया रत्न धारण करने से मानसिक शांति मिलती है। मन में बुरे विचार नहीं आते। क्रोध पर नियन्त्रण रहता है। राजनीति से जुड़े हुए लोगों के लिए यह रत्न धारण करना बहुत फायदेमंद होता है।
  • अगर व्यक्ति के मन में किसी प्रकार का भय है, तो उसे खत्म करने के लिए यह रत्न धारण किया जाता है।यह रत्न पहनने से आलस्य दूर होता है और पोजेटिव फिलिंग आती है।

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