हिंदुओ के प्रत्येक घर में मंदिर अवश्य होता हैं ऐसा कोई ही घर होगा जहां मंदिर या पूजा घर न हो, चाहे अमीर हो या गरीब सब के घर में पूजा के लिये स्थान अवश्य होता हैं । यहां तक कि जिन लोगों के घर में जगह की कमी है, वें लोग भी एक कोने में ईश्वर की स्थापना अवश्य करते हैं, मंदिर वह जगह होती हैं जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपने ईष्ट से जुडाव महसूस करता हैं । इस स्थान पर देवी देवता के प्रतीक चिन्ह (चित्र या मूर्ति) की स्थापना की जाती हैं तथा घर व परिवार के लिए शांति व समृधि की याचना अपने ईष्टदेव से की जाती है । यह स्थान हमारे घर का सबसे पवित्र स्थान होता हैं । क्योंकि पूजा घर ही वास्तव में वह स्थान है, जहां मन की शांति प्राप्त होती है । यह स्थान हमारी अध्यात्मिक चेतना को जागृत करता हैं । इस स्थान की स्थिति आपके भविष्य को दर्शाती हैं तथा आपके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका तय करती हैं ।
आपके पूजा घर की स्थिति से यह बताया जा सकता हैं की आप पर देवी देवता कितने प्रसन्न हैं । हममे से सभी लोग किसी न किसी देवी देवता को अवश्य मानते हैं । हम लोग देवी देवता से कई प्रकार के अनुनय विनय करते रहते है । उनसे नराज होते हैं या उन्हे विभिन्न तरीके से मनाते हैं । लेकिन क्या उनकी कृपा हमे प्राप्त हो पा रही हैं या हम उनके प्रसाद से अभी भी वंचित हैं, इस विषय पर बाद में चर्चा करेंगे उससे पहले घर के मंदिर कि सही स्थिति पर विचार करते हैं । घर के मंदिर हेतु क्या क्या सावधानी रखनी चाहिये एवम वास्तु के अनुसार सही दिशा में मंदिर का निर्माण कैसे करना चाहिये । ताकि वह मंदिर हमारी अध्यात्मिक व भौतिक सुखो की प्राप्ती में सहायक हो सके ।
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर –
1. पूजा घर को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित करने से ज्ञान की वृद्धि तथा आत्मा की शुद्धि होती है।
2- धन की इच्छा हेतु मंदिर को उत्तर दिशा की ओर होना चाहिये ।
3 – विधार्थियो को या ज्ञान प्राप्ति के इच्छुक व्यक्ति को पूर्व दिशा में मंदिर कि स्थापना करनी चाहिये ।
4. शयन कक्ष (सोने वाला कमरा) में देवी- देवताओं की मूर्ति, तथा दक्षिण दिशा में पूजा घर स्थापित नहीं करना चाहिए। अगर जगह न हो तो रात को सोते समय पूजा स्थान को पर्दे से ढक दे ।
5. पूजा घर को शौचालय या स्नानघर के ऊपर- नीचे या आस- पास नहीं बनाना चाहिए।
6- पूजा घर के लिए प्राय: हल्के पीले रंग को शुभ माना जाता है, अतः दीवारों पर हल्का पीला रंग किया जा सकता है।
7 – पूजाघर में प्रतिमाएं कभी भी प्रवेशद्वार के सम्मुख नहीं होना चाहिए।
8- पूजाघर के निकट एवं भवन के ईशान कोण में झाड़ू या कूडेदान आदि नहीं रखना चाहिए। संभव हो तो पूजा घर को साफ करने का झाड़ू-पोंछा भी अलग ही रखें। जिस कपड़े से भवन के अन्य हिस्से का पोंछा लगाया जाता हो उसे पूजाघर में उपयोग में न लाएं।
9- पूजाघर में कलश, गुंबद इत्यादि नहीं बनाना चाहिए।
10 – मंदिर के उपर बीम या कोई भारी वस्तु नही होनी चाहिये ।
देवी देवताओ की दिशा स्थिति –
1- पूजाघर में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र, सूर्य एवं कार्तिकेय का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
2- . पूजाघर में गणेश, कुबेर, दुर्गा का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
3- . पूजाघर में हनुमानजी का मुख नैर्ऋत्य कोण में होना चाहिए।
4- देव प्रतिमा एक दूसरे के सम्मुख कदापि नही होनी चाहिये ।
5- घर के अंदर शिवालय बनाना वर्जित माना गया है, लेकिन आप अन्य देवी-देवताओं के साथ भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति अवश्य रख सकते हैं।
सावधानिया-
1- पूजा घर के अंदर कोई भी खंडित (टूटी-फूटी) मूर्ति या तस्वीर नहीं रखनी चाहिए। मूर्तियों का आकार भी कम से कम होना चाहिए।
2- पूजाघर में किसी प्राचीन मंदिर से लाई गई प्रतिमा या स्थिर प्रतिमा को स्थापित नहीं करना चाहिए।
3- पूजा घर में युद्ध या पशु-पक्षी के चित्र लगाना वास्तु के अनुसार उचित नहीं है।
4- पूजा घर में धन एवम बहुमूल्य वस्तु नही रखनी चाहिये ।
5- एक ही भगवान की एक से ज्यादा प्रतिमा या फोटो नही होनी चाहिये ।
6- घर में जिस स्थान पर मंदिर है, वहां चमड़े से बनी चीजें, जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए।
7- मंदिर में मृतकों और पूर्वजों के चित्र भी नहीं लगाना चाहिए।
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