1.पहले घर में सूर्यः पहले घर में सूर्य बैठा हो तो जातक नैतिकतावादी और कानून का पालन करने वाला होगा। ऐसे इंसान की सोच सकारात्मक होगी साथ ही वह आशावादी और महत्वाकांक्षी भी होगा। यदि पहले घर में सूर्य के साथ शनि और मंगल भी बैठे हों तो जातक आक्रामक स्वभाव का होगा और बुखार, खुजली, आंखों की बीमारी से ग्रसित रहेगा।
2.पहले घर में चंद्रमाः पहले घर का चंद्रमा जातक को रोमांटिक, आधुनिक, आदर्शवादी और व्याकुल बनाता है। जातक का भाग्य मध्यम होता है। यदि किसी महिला जातक की कुंडली के पहले घर में मंगल भी चंद्रमा के साथ बैठा हो तो उसका मासिक धर्म अनियमित रहता है।
यदि चंद्रमा के साथ शनि बैठा हो तो व्यक्ति हमेशा चिंता करने वाला और नकारात्मक सोच वाला होता है। पहले घर में चंद्रमा और मंगल की जोड़ी इंसान को व्यवसाय में लाभ दिलाती है लेकिन यदि पहले घर में राहु, मंगल और चंद्रमा एक साथ हों तो जातक को हिस्ट्रिया की बीमारी होती है। इस घर में चंद्रमा और गुरु की जोड़ी बन रही हो तो जातक बड़ी सोच रखने और बड़ा काम करने वाला होगा।
3.पहले घर में मंगलः मंगल यदि पहले घर में बैठा हो तो जातक गर्म दिमागी, आक्रामक और साहसी होता है। शरीर पर तिल होते हैं साथ ही वह खूबसूरत भी होता है। यदि इस घर का मंगल पीड़ित हुआ तो जातक का पारिवारिक जीवन तबाह हो जाता है। जीवन में प्रायः कटने-छिलने, दुर्घटना, चोटों आदि का सामना करना पड़ेगा। अत्यधिक कामुक प्रवृति के कारण शरीर में कमजोरी बनी रहेगी।
4.पहले घर में बुधः जातक का स्वभाव विनोदी होगा। मधुर वाणी बोलने वाला, मजाकिया, संयमित जीवन जीनने वाला और गणित तथा ज्योतिषशास्त्र जैसे विषयों की तरफ झुकाव रखने वाला होगा। पहले घर के बुध पर शुक्र का प्रभाव पड़ रहा हो तो व्यक्ति तजरबाकार, कला-संगीत को जानने वाला और इस क्षेत्र में बड़ा नाम कमाने वाला होगा। यदि इस घर में बुध के साथ राहु या फिर केतु की जोड़ी बन रही हो तो जातक का जीवन चिंता में बीतेगा।
5. पहले घर में गुरुः इस घर का गुरु जातक को आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी बनाता है। जातक की कुंडली में यदि पांचवां घर पीड़ित नहीं हो तो उसे बहुत संतानों की प्राप्ति होती है। शरीर का वजन बढ़ता है और भारी खाना खाने से स्वास्थ्य में गिरावट आती है।
यदि पहले घर में राहु और गुरु की जोड़ी बन रही हो तो जातक बुरे कर्म करने वाला होता है। शारीरिक रूप से विकलांग हो सकता है। खून की खराबी जैसी बीमारी होती है जिससे शरीर कमजोर रहता है। व्यक्ति लेखक, वकील या फिर पुजारी के रूप में जीवन व्यतीत करता है।
6.पहले घर में शुक्रः जातक कला और संगीत का प्रेमी होगा। यौन क्रिया में लिप्त रहेगा। सुगंधित और खुशबूदार चीजों को पसंद करेगा। ऐसे लोगों की शादी प्रायः बहुत जल्द हो जाती है। आमतौर पर ऐसे जातक का भाग्य अच्छा होता है लेकिन यदि शुक्र को किसी ग्रह से पीड़ा पहुंच रही हो तो जातक के वैवाहिक जीवन में खटास आएगी।
7.पहले घर में शनिः जातक विदेशी रीति-रिवाज को अपनाने वाला होगा। नियम-कानून का पालन नहीं करेगा। जिम्मेदारी से भागने वाला होगा। सुस्ती के कारण अच्छे मौकों को गंवाने वाला होगा।
8.पहले घर में राहुः जातक का झुकाव काले जादू की तरफ रहेगा। भूत और जादू-टोना में विश्वास करने वाला होगा। जातक के वैवाहिक जीवन में कुसंयोग का प्रवेश होगा। ऐसे लोग अपने वचनों पर खरा नहीं उतरते और झूठ बोलते हैं।
9.पहले घर में केतुः इस घर का केतु जातक को कमजोर शरीर प्रदान करता है। जातक की बुद्धि झूठ बोलने वाली और लोगों को धोखा देने वाली होती है। जातक विकृत मानसिकता का स्वामी और ऐसे ही सपने देखने वाला होता है। जातक बहुत गुस्सा करने वाला और पाप कर्म में लिप्त रहने वाला होगा।
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