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मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2021, जानिए इसका महत्त्व

सूर्य के गोचर को ज्योतिष शास्त्र में बहुत अहम माना गया है। सूर्य प्रत्येक माह राशि परिवर्तन करता है, ज्योतिष में सूर्य को पिता का दर्जा दिया गया है। सूर्य के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को सरकारी और अन्य सेवाओं में उच्च पदों की प्राप्ति होती है। सूर्य मान सम्मान का कारक होता हैं। अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य अशुभ होता हैं, तब सरकारी नौकरी में दिक्कते आती हैं, आँख तथा पेट से संबंधित दिक्कते जरुर होती हैं, उसके साथ ही हृदय से जुडी समस्याएं होती हैं।

सूर्य के गोचर को सूर्य संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, इस तरह पूरे साल में 12 संक्रांतियां होती हैं। संक्रांति का सम्बन्ध कृषि, प्रकृति और ऋतु परिवर्तन से भी है। सूर्य देव को प्रकृति के कारक के तौर पर जाना जाता है, इसीलिए संक्रांति के दिन इनकी पूजा की जाती है। सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में  गोचर करने को संक्रांति कहते हैं, संक्रांति एक सौर घटना है। सम्पूर्ण वर्ष में प्रायः कुल 12 संक्रान्तियाँ होती हैं और प्रत्येक संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है। शास्त्रों में संक्रांति की तिथि एवं समय को बहुत महत्व दिया गया है।

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मेष संक्रांति का महत्त्व

हिन्दू धर्म में मेष संक्रांति का अपना एक महत्त्व हैं। हिन्दू सौर कैलेंडर में इसे नए साल की शुरुआत के तौर पर माना जाता हैं। प्राचीन संस्कृत ग्रंथों के अनुसार इस दिन सूर्य के एक विशिष्ट तरह का संक्रमण करता है। मेष संक्रांति आमतौर पर 13 अप्रैल और कभी-कभी 14 अप्रैल को पड़ती है। यह दिन प्रमुख हिंदू, सिख और बौद्ध त्योहारों का आधार है।

संक्रांति भारत देश में मनाया जाने वाला प्रमुख और बहुत ही लोकप्रिय पर्व हैं। शास्त्रों में सूर्य देवता को समस्त भौतिक और अभौतिक तत्वों की आत्मा माना गया है। सूर्य देव को प्रकृति के कारक के तौर पर जाना जाता है, इसीलिए संक्रांति के दिन इनकी पूजा की जाती है। ऋतु परिवर्तन और जलवायु में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव इनकी स्थिति के अनुसार होता है। न केवल ऋतु में बदलाव बल्कि धरती जो अन्न पैदा करती है और जिससे जीव समुदाय का भरण-पोषण होता है, यह सब सूर्य के कारण ही संपन्न हो पाता है। मत्स्यपुराण में संक्रांति के व्रत का वर्णन किया गया है।

मेष संक्रांति के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद गुड़ और तिल का प्रसाद बांटने की परम्परा हैं, जैसा कि हम सभी जानते हैं, संक्राति एक शुभ दिन होता है। पूर्णिमा, एकादशी आदि जैसे शुभ दिनों की तरह ही संक्रांति के दिन की भी बहुत मान्यता है। इसीलिए इस दिन कुछ लोग पूजा-पाठ आदि भी करते हैं।

जो भी भक्त संक्रांति पर व्रत रखना चाहता हो उसे एक दिन पहले केवल एक बार भोजन करना चाहिए। जिस दिन संक्रांति हो उस दिन प्रातः काल उठकर अपने दाँतो को अच्छे से साफ़ करने के बाद स्नान करें। जातक अपने नहाने के पानी में तिल अवश्य मिला लें। इस दिन दान-धर्म की बहुत मान्यता है, इसीलिए स्नान के बाद ब्राह्मण को अनाज, फल आदि दान करना चाहिए। इसके बाद उसे बिना तेल का भोजन करना चाहिए और अपनी यथाशक्ति दूसरों को भी भोजन देना चाहिए।

संक्रांति के दिन गंगा स्नान को महापुण्यदायक माना गया है। माना जाता है कि ऐसा करने पर व्यक्ति को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। देवीपुराण में यह कहा गया है- जो व्यक्ति संक्रांति के पावन दिन पर भी स्नान नहीं करता वह सात जन्मों तक बीमार और निर्धन और गरीबी में अपना जीवन व्यतीत करता रहता है।

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मेष संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व क्यों हैं  

मेष संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व हैं, सुहागन महिलाओं द्वारा वस्तुओं का दान करने से पति की आयु लंबी होती हैं। इस दिन गुड़, चावल और तिल का दान करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन दान करने से सूर्य देव की कृपा से सफलता के मार्ग प्रशस्‍त होते हैं। सूर्य का तेज जीवन में आने वाली असफलताओं का नाश कर जीवन में सफलता प्रदान करने का काम करता हैं।

राशि अनुसार क्या दान करें, जानिए जरुर

  • मेष राशि – मूंगफली, गुड़, तिल, खिचड़ी का दान करना शुभ होता हैं।
  • वृषभ राशि- गन्ना, गाजर, सफ़ेद कपडे और तिल का दान करना चाहिये।
  • मिथुन राशि- गुड़, तिल, कंबल, चावल की खिचडी या मूंगदाल और चावल दान देना शुभ होता है।
  • कर्क राशि- तिल, कंबल, सफ़ेद कपडे, चांदी तथा चावल का दान सर्वश्रेष्ठ होता है।
  • सिंह राशि- तांबा और सोना, सफ़ेद कपडे, तिल दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
  • कन्या राशि- चावल, हरे मूंग, गन्ना, गाजर, या हरे कपड़े का दान देना चाहिए।
  • तुला राशि- हीरे, चीनी, चावल, कंबल का देना करना शुभ होता हैं।
  • वृश्चिक राशि- मूंगा, लाल कपड़ा, गन्ना, गाजर और तिल दान करना शुभ होता हैं।
  • धनु राशि- गुड़, गन्ना, पीतल, पंचधातु व तिल का दान करना शुभ होता हैं।
  • मकर राशि- चावल की खिचड़ी, बेसन के लड्डू या अष्टधातु से बनी वस्तुओं का दान करना चाहिए।
  • कुंभ राशि- काला कपड़ा, काली उड़द, खिचड़ी और तिल का दान करना चाहिए।
  • मीन राशि- रेशमी कपड़ा,चने की दाल, चावल, खिचडी और तिल दान करना शुभ होता है।

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