शास्त्रों में मां दुर्गा को महामाया के नाम से भी पुकारा गया है। महामाया मतलब मायापति भगवान श्रीविष्णु को भी माया में डालने वाली। श्रृष्टि की रचना के बाद से आज तक संसार में इंसान जो भी कर रहा है जो सोच रहा है या जिसके लिए कर रहा है सभी मां महामाया की इच्छा से ही हो रहे हैं।
राजा हो या रंक सभी के लिए एक समान और प्रेम की भूखी मां बस अपने भक्तों पर आशीर्वाद बरसाने का काम करती है और जब ताकत के घमंड में मानव या दानव अपने कर्तव्य को भूल जाए तो उसे सीख भी देती है। ऐसा ही एक प्रसंग हमे महाराज अकबर से जुडा हुवा मिलता हैं । इस मंदिर की सब से बडी खासियत हैं कि यहा आने वाला हर व्यक्ति चमत्कारो द्वारा माता का भक्त बन जाता हैं ।
जानें कैसा होगा आने वाला साल आपके लिए क्या मिलेगी आपको नौकरी आने वाले साल में
माता सती की गिरी थी जीभ…
ज्वालामुखी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित है। माना जाता है कि यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। इस मंदिर का अस्तित्व द्वापर युग से भी पहले का है। इस मंदिर की विशेष बात यह है कि यहां माता की किसी मूर्ति की पूजा नहीं बल्कि धरती से निकलने वाली ज्वाला की पूजा की जाती है।
सिपाहियों ने रोकी थी भक्तों की यात्रा…
एक बार की बात है मां ज्वालामुखी का एक परम भक्त ध्यानू मां के दर्शन के लिए जा रहा था। उसके साथ हजारों भक्त भी मां की दर्शन के लिए जा रहे थे। उस समय इस देश पर अकबर का राज था। हजारों लोगों को एक साथ जाते देख राजा अकबर के सिपाहियों ने भक्तों को रोक लिया और अकबर के दरबार में पेश किया।
अकबर ने कटवाई घोड़े की गर्दन…
अकबर ने भक्तों से यात्रा के बारे में पूछा तो ध्यानू ने बताया कि वे लोग मां ज्वालामुखी का दर्शन करने के लिए जा रहा हैं। ध्यानू ने उत्सुकतावश अकबर को मां की शक्ति और महिमा की बहुत सारी कथाएं सुनाईं। घमंड में चूर मुगल शासक अकबर को ध्यानू की बात अच्छी नहीं लगी इसलिए उसने माता की शक्ति को चुनौती देते हुए ध्यानू से कहा कि तुम्हारे घोड़े को यदि में जान से मार दूं तो क्या तुम्हारी माता फिर से जिंदा कर देगी।
पुन: जुडी घोड़े की गर्दन…
ध्यानू था माता का परम भक्त। उसके हां कहते ही अकबर के आदेश पर उसके घोड़े का सिर काट दिया गया और ध्यानू को छोड़ दिया गया। ध्यानू सीधा माता की शरण में पहुंचा और खूब पूजा-अर्चना की। रात भर जागररण किया और माता से आस्था की लाज रखने की मांग की। ध्यानू ने सच्चे ह्रदय से पूजा की थी इसलिए माता प्रसन्न हुई और घोड़े का सिर फिर से जुड़ गया।
नदी के पानी से नहीं बुझी ज्वाला…
मुगल शासकों को हिंदू धर्म में रुचि तो थी नहीं और ऐसी अनोखी घटना को सामने सच होते देख अकबर के आश्चर्य की सीमा नहीं रही, लेकिन सच को पहचानने की बजाय अकबर पर अपने सर्वशक्तिशाली होने का घमंड था। अतः वह खुद अपने सैनिकों के साथ माता ज्वालामुखी मंदिर आ धमका और मंदिर में निकल रही ज्वाला को पानी से बुझाने का आदेश दिया।
माता ने तोड़ा अकबर का घमंड…
अकबर के सैनिकों ने मंदिर के बगल में नदी खोद दी और ज्वाला को बुझाने के लिए हर संभव कोशिश की। भला सामान्य मानव और कहां श्रृष्टि को अपने माया से नचाने वाली महामाया। ज्वाला बुझी नहीं तो सैनिकों ने हार मान ली। अंत में अकबर को भी सद्धबुद्धि आई और उसने माता से क्षमा मांग कर भेंट स्वरूप सोने का छत्र चढ़ाया लेकिन क्रोधित हुईं माता ने उसे स्वीकार नहीं किया।
अंग्रेजों को भी मिली हार…
ज्वाला माता मंदिर में एक नहीं दो नहीं बल्कि नौ ज्वाला प्रज्जवलित होती रहती हैं। मंदिर के ठीक नजदीक गोरख डिब्बी है जिसका पानी खौलता हुआ प्रतीत होता है लेकिन छूने पर वह बिल्कुल ठंडा होता है। कहते हैं कि अंग्रेजों ने निकल रही ज्वाला के भेद को जानने की पूरी कोशिश की लेकिन आखिरकार उन्हें भी सफलता हाथ नहीं लगी।
खरीदें अपना लकी जेमस्टोन GemsVidhi.com से
और 10 min एस्ट्रो कंसल्टेशन फ्री हमारे पंडित जी के साथ
किसी भी जानकारी के लिए Call करें : 8285282851
ज्योतिष से संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें :Astrologer on Facebook

मेष
वृषभ
मिथुन
कर्क
सिंह
कन्या
तुला
वृश्चिक
धनु
मकर
कुम्भ
मीन 








