भगवान गणेश के इन 12 स्‍वरूपों की अपनी समस्‍या के अनुसार करें पूजन

हिंदू धर्म और शास्‍त्र में भगवान गणेश को प्रथम पूज्‍य बताया गया है। देश के अलग-अलग हिस्‍सों में गणेश जी को विभिन्‍न रूपों और नामों से पूजा जाता है। देशभर में गणेश जी का पूजन धूमधाम से होता है और गणेश चुतर्थी का पर्व तो देशभर में बहुत हर्ष और उल्‍लास के साथ मनाया जाता है।

गणेश जी को अत्‍यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य या मंगल कार्य को शुरु करने से पहले गणेश जी की आराधना करने का नियम है। शास्‍त्रों के अनुसार भगवान गणेश के 12 स्‍वरूप हैं। इनके हर स्‍वरूप की अलग कथा और महत्‍व है। किस कामना या समस्‍या के लिए भगवान गणेश के किस रूप का पूजन करना चाहिए ये जानना भी बहुत जरूरी है। तो आइए जानते हैं इसी सवाल का जवाब…

महा गणेश

भगवान गणेश की महा गणेश के रूप में पूजा करने से भविष्‍य की हर परेशानी और समस्‍या का नाश होता है। ये स्‍वरूप जीवन में सफलता प्रदान करता है।

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द्विज गणपति

गणेश जी के इस स्‍वरूप की पूजा करने से स्‍वास्‍थ्‍य और सुख की प्राप्‍ति होती है। इन स्‍वरूप में गणेशजी के दो सिर और चार हाथ होते हैं।

हेरंग गणपति

गणपति जी का यह स्‍वरूप मनुष्‍य की संपत्ति और धन की रक्षा करता है। इस स्‍वरूप में गणेश जी के पांच सिर और दस हाथ होते हैं।

वीर गणपति

गणेश जी के इस स्‍वरूप की पूजा करने से व्‍यक्‍ति पराक्रमी और साहसी बनता है। महिलाओं को रोगों से बचाने के लिए भी इस स्‍वरूप का पूजन किया जाता है। अपने इस रूप में गणेश जी ने अपनी सोलह भुजाओं में भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार के शस्‍त्र लिए हुए हैं।

करपग विनायगर

गणपति जी का ये स्‍वरूप हर मनोकामना को पूर्ण कर आपको आर्थिक रूप से समृद्ध बनाता है।

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गणेशनी

जीवन में आने वाली हर परेशानी, हर मुश्किल और बीमारी को दूर करता है गणेश जी का गणेशनी स्‍वरूप। ये आपके जीवन में केवल अच्‍छे संबंधों के आने का ही मार्ग खोलते हैं।

नरमुग गणपति

ये स्‍वरूप भगवान गणेश का प्राचीन रूप है। इस स्‍वरूप में गणेशजी का मुख हाथी का नहीं बल्कि मनुष्‍य का ही है।

सिद्धि-बुद्धि गणपति

इस स्‍वरूप में भगवान गणेश अपनी दोनों पत्नियों ऋद्धि और सिद्धि के साथ विराजमान हैं। सिद्धि हमें सहजज्ञान और बुद्धि हमें व्‍यवहारिक ज्ञान प्रदान करती हैं।

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 नृत्‍य गणपति

वृक्ष के नीचे नृत्‍य करते गणपति जी की आराधना करने से मनोकामना पूरी होती है और जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही अपने पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है

विघ्‍नहर्ता

श्रीगणेश का यह स्‍वरूप विघ्‍नों का नाश करता है। इनकी पूजा करने से आपके कार्य में आने वाली सभी रुकावटें दूर होती हैं।

अलिंग नर्तन गणपति

इस स्‍वरूप में गणपति जी कलिंग नामक सांप के फन पर नृत्‍य कर रहे हैं। यह रूप बुराई पर अच्‍छाई की जीत को दर्शाता है।

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समस्‍या

इस स्‍वरूप में गणेशजी उन लोगों की सहायता करने हैं जो अच्‍छे कर्मों के बावजूद समस्‍याओं से जूझ रहे हैं।

गणेश जी के इन स्‍वरूपों की पूजा आप अपनी समस्‍या के अनुसार कर सकते हैं। भगवान गणेश हर रूप में अपने भक्‍तों की सहायता करते हैं। भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए आप अपने घर या दुकान में मूंगा गणेश की स्‍थापना भी कर सकते हैं।

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अपने द्वार पर आए प्रत्‍येक भक्‍त की मनोकामना को गणेश जी पूरा करते हैं। मान्‍यता है कि इनके पाए आए भक्‍त कभी खाली हाथ नहीं लौटते हैं। तो अगर आपकी भी कोई मनोकामना अधूरी रह गई है तो आप भी बिना कोई देर किए गणेश जी की शरण में आ जाएं।

किसी भी जानकारी के लिए Call करें :  8882540540

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भगवान गणेश के इन 12 स्‍वरूपों की अपनी समस्‍या के अनुसार करें पूजन
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