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दशहरे के दिन ये काम करने से मिलता है पुण्य |जानिये दशहरा 2020 तिथि और शुभ मुहूर्त

दशहरा पूरे भारत वर्ष में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व हैं। भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस पवित्र पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता हैं। कुल्लू का दशहरा पूरे विश्व में बहुचर्चित हैं, तो पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा समेत कई राज्यों में दुर्गा पूजा को भी इस दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता हैं। अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन ही पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था। इस दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले फूंक कर लोगों को बुराई पर अच्छाई की जीत का सन्देश दिया जाता हैं। दशहरा मुहूर्त अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दोपहर के बाद मनाया जाता है।  

दशहरा तिथि एवं मुहूर्त

25 अक्टूबर, रविवार

विजय मुहूर्त- 13:55 से 14:40 तक

पूजा का समय- 13:11 से 15:24 तक

दशमी तिथि आरंभ- 07:41 (25 अक्टूबर 2020)

दशमी तिथि समाप्त- 08:59 (26 अक्टूबर 2020)

दशहरे की पूजा विधि

  • दशहरे के दिन शस्त्र पूजा का विशेष महत्व होता हैं, इसलिए इस दिन क्षत्रिय लोग अपने शस्त्र की पूजा करते हैं।
  • इस दिन जो भी शस्त्र हैं, उनकी पूजा से पहले इन्हें पूजा स्थान पर लाल कपडा बिछाकर रख दिया जाता हैं उसके बाद इन्हें गंगाजल से पवित्र किया जाता हैं, उन पर गंगाजल का छिडकाव किया जाता हैं।

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  • उसके बाद इन शस्त्रों पर हल्दी, कुमकुम का तिलक किया जाता हैं, उन पर फूल अर्पित किये जाते हैं और सुगंधित धूप दिखाई जाती हैं।
  • इसके बाद शस्त्रों पर शमी के पत्तों को अर्पित किया जाता हैं, इस दिन शमी के पत्तों को बहुत ही शुभ माना जाता हैं।
  • पूजा के बाद शस्त्रों को प्रणाम किया जाता हैं और भगवान श्री राम का ध्यानकिया जाता हैं और उसके बाद शस्त्रों को अपने स्थान पर ही रख दिया जाता हैं और शमी के पेड़ की पूजा इस दिन अवश्य करनी चाहिए।  

दशहरे के दिन ये काम करने से मिलता है पुण्य:-

  • कहते है दशहरे के दिन यदि किसी भी भक्त को नीलकंठ नाम का पक्षी दिख जाए तो काफी शुभ होता है। कहते है नीलकंठ भगवान शिव का प्रतीक है, जिनके दर्शन मात्र से ही सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • दशहरे के दिन गंगा स्नान करने को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। कहा जाता ही की दशहरे के दिन गंगा स्नान करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है, इसलिए दशहरे के दिन पुण्य प्राप्त करने के लिए लोग गंगा या अपने आसपास के किसी पवित्र नदी में स्नान करने जाते है।

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दशहरे का महत्व 

दशहरा भगवान श्री राम की कहानी कहता हैं, जिन्होंने लंका में 9 दिनों तक लगातार चले युद्ध के पश्चात अहंकारी रावण को मार गिराया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया। हिन्दू धर्म में इस पर्व को बहुत पवित्र माना जाता हैं। इसी दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिए भी इसे विजयादशमी के रूप में मनाया जाता हैं। माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी माँ दुर्गा की पूजा कर शक्ति का आव्हान किया था। भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिए रखे गये कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया। चूँकि श्री राम को राजीवनयन यानी कमल से नेत्रों वाला कहा जाता है इसलिए उन्होंने अपना एक नेत्र माँ को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकलने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयी होने का आशीर्वाद दिया। माना जाता है की इसके बाद दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया और भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस पर्व को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है |

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