पूरे संसार में सिर्फ यहां होती है ब्रह्मा जी की पूजा, जानिए क्‍या है खास

हिंदू धर्म में सबसे शक्‍तिशाली और सर्वोपरि त्रिदेवों को माना गया है। ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता हैं तो वहीं विष्‍णु जी संसार के पालन हार हैं। महेश यानि भगवान शिव को विनाशक माना जाता है क्‍योंकि भगवान शिव पाप का अंत कर मृत्‍यु देते हैं।

ये तो सभी जानते हैं कि पृथ्‍वी पर भगवान शिव और विष्‍णु जी के अनेक मंदिर हैं जिनसे उनके कई अवतारों और चमत्‍कारों की कथाएं जुड़ी हुई हैं। वे मंदिर यां स्‍वयं उनके नाम से जुड़े हैं या फिर उनके किसी अवतार से संबंधित हैं। जैसे कि विष्‍णु जी के अवतार श्रीकृष्‍ण के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। भगवान शंकर का भी केदारनाथ धाम काफी प्रसिद्ध है।

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ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर

लेकिन पूरे विश्‍व में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का केवल एक मंदिर ही हैं। ऐसा क्‍यों? पूरी दुनिया को रचने वाले ब्रह्मा जी के केवल तीन मंदिर होना आश्‍चर्य में डाल देता है किंतु ये सच है।

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी के पूजन को वर्जित माना गया है और इसीलिए पूरे विश्‍व में ब्रह्मा जी के ना के बराबर ही मंदिर हैं। किवदंती है कि एक बार ब्रह्मा जी के मन में धरती की भलाई के लिए यज्ञ करने की इच्‍छा हुई। यज्ञ के स्‍थान की तलाश करने ब्रह्मा जी ने अपनी बांह से निकले हुए कमल को धरती पर भेज दिया।

पुष्‍कर शहर की स्‍थापना

मान्‍यता है कि जिस स्‍थान पर वह कमल गिरा वहीं ब्रह्मा जी का एक मंदिर बनाया गया है। आज इस स्‍थान को राजस्‍थान के पुष्‍कर शहर के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि इसी स्‍थान पर ब्रह्मा जी का पुष्‍प कमल गिरा था जिसके बाद इस शहर का नाम पुष्‍कर पड़ गया।

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पुष्‍कर में है एकमात्र मंदिर

केवल पुष्‍कर ही एकमात्र ऐसा स्‍थान है जहां ब्रह्मा जी का मंदिर है। अब इस मंदिर को ‘जगत पिता ब्रह्मा’ के नाम से जाना जाता है। वैसे तो यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतार रहती है लेकिन फिर भी कोई भी भक्‍त यहां ब्रह्मा जी की पूजा नहीं करता।

यज्ञ का आंरभ

हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मंदिर के पास बड़े स्‍तर पर मेले का आयोजन किया जाता है। कथा के अगले चरण के अनुसार पुष्‍कर स्‍थान पर ब्रह्मा जी ने यज्ञ करने का निश्‍चय किया। लेकिन इस यज्ञ में उनकी पत्‍नी सावित्री समय पर ना पहुंच पाईं

ब्रह्मा जी ने किया दूसरा विवाह

यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकलते देख ब्रह्मा जी ने वहीं एक स्‍थानीय ग्‍वाल बाला से विवाह कर लिया और उसके साथ यज्ञ में बैठ गए। यज्ञ चल ही रहा था कि तभी सावित्री जी वहां आ पहुंची और अपने स्‍थान पर किसी और स्‍त्री को देखकर क्रोधित हो उठीं।

सावित्री का श्राप

गुस्‍से में सावित्री जी ने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि पृथ्‍वी लोक पर कहीं भी तुम्‍हारी पूजा नहीं होगी। लोग तुम्‍हे कभी याद नहीं करेंगें और जो भी तुमहारी पूजा करेगा उसे मृत्‍यु की प्राप्‍ति होगी।

ब्रह्मा जी की पूजा हुई वर्जित

बस तभी से ब्रह्मा जी की पूजा बंद हो गई। कई बार कुछ लोगों ने ब्रह्मा जी का मंदिर बनाने का प्रयास भी किया किंतु या तो उनके साथ कुछ अनहोनी हो  गई या वे असमय ही मृत्‍यु को प्राप्‍त हो गए।

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