हिंदु धर्म में प्रत्येक कार्य को करने के लिये एक निश्चित समय विभाग बनाया गया हैं। भगवान के पूजन से लेकर, युध जैसे क्रूर कर्मो के लिये भी समय की व्यवस्था की गई हैं। जिससे की उन कार्यों में अधिकाधिक सफलता प्राप्त की जा सकें। इस समय विभाजन को मुहुर्त कहते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिन को 30 हिस्सों में विभाजित किया गया हैं। इन 30 हिस्सों को ही मुहुर्त कहा जाता हैं। इसके अनुसार 48 मिनट का एक मुहुर्त होता हैं। सूर्योदय के समय से गिनकर 8 वें हिस्से के आधे भाग को अभिजित मुहुर्त कहा जाता हैं। अर्थात आठवें मुहुर्त के शुरु के 12 मिनट व अंत के 12 मिनट के मध्य का समय अभिजित मुहुर्त होता हैं। दिन के लगभग 12 बजें के आसपास इस मुहुर्त का समय होता हैं।
अभिजित मुहुर्त का शास्त्रो में वर्णन हैं । यह मुहुर्त हर प्रकार की इच्छा पूर्ण करने वाला समय हैं। इस समय किया गया कोई भी शुभ कर्म अवश्य फलदायी होता हैं। लगभग सभी अचार्यो व ऋषियों ने अभिजित मुहुर्त की भूरी भूरी प्रशंसा की हैं। इस समय उत्पन्न जातक अत्यधिक भाग्यशाली होता हैं। धन से युक्त होता हैं, ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में प्रत्येक सुख की प्राप्ती करते हैं। इस मुहुर्त में जन्में जातक को गंडांत दोष नही लगता। गंडमूल दोष कारी नही होता। तिथी व वार दोष भी विशेष प्रभाव शाली नही होते। इस मुहुर्त का एक और विशेष फल हैं कि इस समय जन्मा जातक लम्बी उम्र प्राप्त करता हैं।
इसके अतिरिक्त अभिजित मुहुर्त रात्री के समय में भी होता हैं, सूर्यास्त के बाद आठवां मुहुर्त्। इसका भी दिन के मुहुर्त के समान फल होते हैं। मुहुर्त शास्त्रों में इसे अत्यधिक महत्व दिया गया हैं। अभिजित मुहुर्त के विषय में कहा जाता हैं कि यदि कोई मुहुर्त न मिल पा रहा हों, अशुभ दिन हो, शुभ तिथि नक्षत्र या लग्न का अभाव हो तो इस समय कार्य करना चाहिये। बुध वार के दिन इस मुहुर्त को प्रभाव हीन कहा जाता हैं। इस मुहुर्त में दक्षिण दिशा की यात्रा करना वर्जित हैं।
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